Navratri 2020: नवरात्रि में करें देवी कामाख्‍या के दर्शन, खुल गया है अद्भुत मंदिर

नवरात्रि में करें देवी कामाख्‍या के दर्शन
नवरात्रि में करें देवी कामाख्‍या के दर्शन

Navratri 2020: कामाख्‍या मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्‍तों को पहले कोरोन टेस्‍ट कराना होगा. केवल वही भक्त दर्शन कर सकेंगे जिनके पास तीन दिन पहले तक की कोरोना रिपोर्ट है. जानकारी के मुताबिक देवालय कॉप्‍लेक्‍स का गेट सामान्‍य दिनों में सुबह 8 बजे से सूर्यास्‍त तक भक्‍तों के लिए खुला रहेगा...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2020, 6:45 AM IST
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Navratri 2020: नवरात्रि 17 अक्टूबर से लग रही है. नवरात्रि में भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और मंदिर में दर्शन और आरती करने जाते हैं. लेकिन कोरोना काल के चलते इस बाद मंदिरों में दर्शन के लिए जरूरी निर्देशों का पालन करना होगा. कोरोना काल में बंद असम के गुवाहाटी (Guwahati) में स्थित कामाख्‍या मंदिर (Kamakhya Temple) गत रविवार से भक्‍तों के लिए खुल गया है. हालांकि अभी मंदिर के आंतरिक गर्भ गृह को भक्‍तों के लिए बंद रखा गया है. कामाख्या देवी मंदिर (Kamakhya Devi Temple) 51 शक्तिपीठों में से एक है. यह शक्तिपीठ बहुत ही प्रसिद्ध और चमत्कारी है. इस मंदिर (Temple) को अघोरियों और तांत्रिकों का गढ़ माना जाता है. असम की राजधानी गुवाहाटी (Guwahati) से दिसपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शक्तिपीठ नीलांचल पर्वत से 10 किलोमीटर दूर है.

कोरोना काल में मंदिर आने से पहले जान लें नियम:

कामाख्‍या मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्‍तों को पहले कोरोन टेस्‍ट कराना होगा. केवल वही भक्त दर्शन कर सकेंगे जिनके पास तीन दिन पहले तक की कोरोना रिपोर्ट है. जानकारी के मुताबिक देवालय कॉप्‍लेक्‍स का गेट सामान्‍य दिनों में सुबह 8 बजे से सूर्यास्‍त तक भक्‍तों के लिए खुला रहेगा. वहीं दुर्गा पूजा के दौरान इसका समय बदल भी सकता है. मंदिर में देवी मां के दर्शन के लिए आने वाले भक्‍तों की थर्मल स्‍क्रीनिंग होगी और सभी के लिए मास्‍क लगाना जरूरी होगा.



कामाख्या मंदिर में क्या है ख़ास:
कामाख्या मंदिर सभी शक्तिपीठों का महापीठ माना जाता है. इस मंदिर में दुर्गा या मां अम्बे की कोई मूर्ति या चित्र नहीं है. मंदिर में एक कुंड बना है, जो हमेशा फूलों से ढ़का रहता है. इस कुंड से हमेशा पानी निकलता है. कामाख्या मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता है कि मंदिर में देवी सती की योनि की पूजा की जाती है और योनि भाग के यहां होने से माता यहां रजस्वला भी होती हैं.

मंदिर का नाम कैसेपड़ा ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव का मां सती के प्रति मोह भंग करने के लिए विष्णु भगवान ने अपने चक्र से माता सती के 51 भाग किए थे जहां पर ये भाग गिरे वहां पर माता का एक शक्तिपीठ बन गया और इस जगह माता की योनी गिरी थी. आज यह बहुत ही शक्तिशाली पीठ है. यहां सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का अलग ही महत्व है. इन दिनों मंदिर में लाखों की संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है.

हर साल यहां अम्बुवाची मेले के दौरान पास में स्थित ब्रह्मपुत्र का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है. ऐसी मान्यता है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है. फिर तीन दिन बाद दर्शन के लिए यहां भक्तों की भीड़ मंदिर में उमड़ पड़ती है. मंदिर में भक्तों को बहुत ही अजीबो-गरीब प्रसाद दिया जाता है. दूसरे शक्तिपीठों की अपेक्षा कामाख्या देवी मंदिर में प्रसाद के रूप में लाल रंग का गीला कपड़ा दिया जाता है. कहा जाता है कि जब मां को तीन दिन का रजस्वला होता है, तो सफेद रंग का कपडा मंदिर के अंदर बिछा दिया जाता है. तीन दिन बाद जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब वह वस्त्र माता के रज से लाल रंग से भीगा होता है. इस कपड़ें को अम्बुवाची वस्त्र कहते हैं. इसे ही भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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