Navratri 2021 5th Day: नवरात्रि में पढ़ें स्कंदमाता का कवच और कथा, मिलेगा मां का आशीर्वाद

नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित माना जाता है.

नवरात्रि का पांचवां दिन स्कंदमाता को समर्पित माना जाता है.

Navratri 2021 5th Day Worship Maa Skandmata Kavach And Katha- आज भक्तों ने सुबह स्कंदमाता की पूजा अर्चना, आरती और मंत्रों का जाप किया और शाम को कथा और कवच का पाठ करेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 9:55 AM IST
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Navratri 2021 5th Day Worship Maa Skandmata Kavach And Katha- नवरात्रि का आज पांचवां दिन है, इसे पंचमी भी कहते हैं. नवरात्रि की पंचमी मां नव दुर्गा के स्कंदमाता स्वरुप को समर्पित मानी गई है. मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता की पूजा अर्चना करने से संतान की प्राप्ति होती है और बुद्धि तेज होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी स्कंदमाता की कृपा से ही कालिदास ने रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत जैसी महान रचनाएं की हैं. आज भक्तों ने सुबह स्कंदमाता की पूजा अर्चना, आरती और मंत्रों का जाप किया और शाम को कथा और कवच का पाठ करेंगे. आइए पढ़ते हैं चैत्र नवरात्रि के अवसर पर स्कंदमाता का कवच और कथा...

स्कंदमाता का कवच:

ऐं बीजालिंका देवी पदयुग्मघरापरा.

हृदयं पातु सा देवी कार्तिकेययुता॥
श्री हीं हुं देवी पर्वस्या पातु सर्वदा.

सर्वांग में सदा पातु स्कन्धमाता पुत्रप्रदा॥

वाणंवपणमृते हुं फट् बीज समन्विता.



उत्तरस्या तथाग्नेव वारुणे नैॠतेअवतु॥

इन्द्राणां भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी.

सर्वदा पातु माँ देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै॥

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स्कंदमाता की कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में तारकासुर नाम का एक अत्याचारी राक्षस था. तारकासुर हमेशा के लिए अमर होन चाहता था इसलिए उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया. तारकासुर का कठोर तप देख ब्रह्मा जी बेहद प्रसन्न हो गए. उन्होंने प्रसन्न होकर तारकासुर को दर्शन दिए. उस कठोर तप से ब्रह्मा जी प्रसन्न होकर उनके सामने आए. ब्रह्मा जी से वरदान मांगते हुए तारकासुर ने अमर करने के लिए कहा. ब्रह्मा जी ने उसे समझाया कि जिसका जन्म हुआ है उसे मरना ही होगा. फिर तारकासुर ने निराश होकर ब्रह्मा जी से कहा कि प्रभु ऐसा कर दें कि शिवजी के पुत्र के हाथों ही उसकी मृत्यु हो. उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वो सोचता था कि कभी-भी शिवजी का विवाह नहीं होगा तो उनका पुत्र कैसे होगा. इसलिए उसकी कभी मृत्यु नहीं होगी. फिर उसने लोगों पर हिंसा करनी शुरू कर दी. हर कोई उसके अत्याचारों से परेशान था. सब परेशान होकर शिवजी के पास पहुंचे. उन्होंने शिवजी से प्रार्थना की कि वो उन्हें तारकासुर से मुक्ति दिलाएं. तब शिव ने पार्वती से विवाह किया और कार्तिकेय के पिता बने. बड़े होने के बाद कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया. स्कंदमाता कार्तिकेय की माता हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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