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उम्र के अनुसार है कन्याओं का महत्व, जानें अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

मान्यताओं के अनुसार, 2 वर्ष तक की कन्याओं को कुमारी कन्या कहा जाता है.

मान्यताओं के अनुसार, 2 वर्ष तक की कन्याओं को कुमारी कन्या कहा जाता है.

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हाइलाइट्स

8 वर्ष की कन्या को देवी शांभवी के रूप में पूजा जाता है.
9 साल की कन्या को देवी दुर्गा के रूप में पूजा जाता है.

Navratri 2022 : नवरात्रि का पवित्र त्योहार अपने समापन की ओर बढ़ रहा है. जगह-जगह भंडारे और कन्या पूजन की तैयारी हो रही है. हिंदू धर्म के अनुसार, नवरात्रि के व्रत पूजन का फल कन्या पूजन के बिना नहीं मिल पाता. पुराणों के अनुसार, चैत्र और शारदीय नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर 9 कन्याओं के पूजन को विशेष महत्व दिया गया है. ऐसा माना जाता है कि कन्या और बटुक की पूजा करने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं. यह भी माना जाता है कि आयु के अनुसार यदि कन्या पूजन किया जाए, तो इससे माता दुर्गा व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी करती हैं. आइए जानते हैं भोपाल के रहने वाले ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से कब है कन्या पूजन.

कब करें कन्या पूजन

इस बार नवरात्रि में कन्या पूजन अष्टमी यानी 3 अक्टूबर 2022 को किया जा सकता है. इसके अलावा नवमी पर कन्या पूजन से विशेष लाभ प्राप्त होता है. मान्यता के अनुसार, यदि कन्या का पूजन शुभ मुहूर्त में किया जाए तो इस से 2 गुना फल प्राप्त किया जा सकता है. साथ ही माता दुर्गा का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.

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कन्या पूजन 2022 अष्टमी मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त- 12.04 PM – 12.51 PM
विजय मुहूर्त- 02.27 PM – 03.14 PM
गोधूलि मुहूर्त- 06.13 PM – 06.37 PM

कन्या पूजन 2022 नवमी मुहूर्त

अभिजित मुहूर्त – 11.52 PM – 12.39 PM
गोधूलि मुहूर्त – 05.58 PM – 06.22 PM
अमृत मुहूर्त – 04.52 PM – 06.22 PM

उम्र के हिसाब से करें कन्या पूजन, मिलेंगें यह लाभ

-मान्यताओं के अनुसार, 2 वर्ष तक की कन्याओं को कुमारी कन्या कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि अष्टमी या नवमी के दिन इनकी पूजा करने से घर की दुख और दरिद्रता दूर होती है. साथ ही खुशियों का आगमन होता है.

-3 वर्ष तक की कन्याओं को त्रिमूर्ति कहा जाता है. मान्यता है कि इस उम्र की कन्याओं को पूजने से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है और माता दुर्गा से वंश में वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

-4 वर्ष तक की कन्याओं को धर्म पुराणों में कल्याणी कहा गया है. मान्यता है कि 4 वर्ष तक की कन्याओं की पूजा करने से बुद्धि, विद्या में बढ़ोत्तरी और राज सुख प्राप्त होता है.

-5 वर्ष की कन्याओं को रोहिणी कहा जाता है. ऐसा माना गया है कि इस उम्र की कन्याओं की पूजा करने के व्यक्ति को गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है.

-पुराणों के अनुसार 6 साल की कन्याओं को कालिका का रूप माना गया है. ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मां भवानी का आशीर्वाद मिलता है.

-पुराणों में 7 वर्ष तक की कन्या को चंडिका कहा गया है. ऐसा माना जाता है कि इस स्वरूप की उपासना करने से व्यक्ति को धन और ऐश्वर्य प्राप्त होता है.

-8 वर्ष की कन्या को देवी शांभवी के रूप में पूजा जाता है. इनके पूजन से चल रहे मुकदमे जल्दी हल होते हैं और कोई पुराना विवाद हो तो वह भी समाप्त होता है.

-9 साल की कन्या को देवी दुर्गा के रूप में पूजा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस उम्र की कन्याओं की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के कष्ट और दोष दूर होते हैं और इस से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है.

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-पुराणों में 10 वर्ष की कन्या को सुभद्रा कहा गया है. ऐसी मान्यता है कि इस उम्र की कन्याओं की पूजा करने से बिगड़े काम सही होते हैं. इसके अलावा व्यक्ति का मनोरथ भी पूर्ण होता है.

Tags: Dharma Aastha, Navaratri, Navratri, Navratri Celebration, Religion

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