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Navratri 2022: देवी भागवत कथा की कृपा से जब राजा सुद्युम्न स्त्री से बने पुरुष, श्राप से मिली मुक्ति

नवरात्रि में देवी भागवत पुराण का बड़ा महत्व है.

नवरात्रि में देवी भागवत पुराण का बड़ा महत्व है.

देशभर में मां दुर्गा की अलग-अलग विधियों व रीतियों से पूजा-पाठ व यज्ञ हो रहे हैं. नवरात्रि में देवी भागवत पुराण का बड़ा ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

राजा सुद्युम्न एक बार विहार करते हुए वे ऐसे जंगल में पहुंच गए, जो भगवान शंकर द्वारा शापित था.
राजा सुद्युम्न पहुंचे तो वे भी स्त्री बन गए.
राजा के स्त्री से पुरुष बनने की कथा भगवान कार्तिकेय ने अगस्त ऋषि को सुनाई थी.

Navratri 2022: नवरात्रि पर हर ओर आस्था व उल्लास का माहौल है. देशभर में मां दुर्गा की अलग-अलग विधियों व रीतियों से पूजा-पाठ व यज्ञ हो रहे हैं. बहुत सी जगहों पर श्रीमद्देवी भागवत पुराण की कथाओं का भी आयोजन हो रहा है. आज हम आपको इसी देवी भागवत पुराण की एक ऐसी कथा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें मनुवंशी राजा भगवान शंकर के श्राप से मुक्त होकर स्त्री से पुरुष बन गये थे. पुराण के अनुसार इस कथा को भगवान शंकर के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी ने अगस्त ऋषि को सुनाया था.

पहले पुत्र के यज्ञ में हुई पुत्री
पंडित रामचंद्र जोशी के अनुसार कार्तिकेय जी द्वारा सुनाई गई इस कथा के अनुसार, विवस्वान मनु के पुत्र श्राद्ध देव थे. जिनकी पुत्र प्राप्ति के लिए वशिष्ठ मुनि ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया था. पर हवन के समय श्राद्धदेव की पत्नी श्रद्धा के पुत्री की कामना करने पर पुत्र की जगह इला नामक पुत्री उत्पन्न हो गई. इस पर राजा उदास हो गए. उनकी मंशा जान गुरु वशिष्ठ ने तपोबल से इला को फिर पुरुष बना दिया. जिनका नाम सुद्युम्न रखा गया.

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सुद्युम्न का फिर स्त्री बनकर पुरुष बनना
पंडित जोशी के अनुसार राजा सुद्युम्न वीर और विद्वान थे. एकबार विहार करते हुए वे ऐसे जंगल में पहुंच गए, जो भगवान शंकर द्वारा शापित था. माता पार्वती के साथ हास- विलास करते हुए मुनियों के पहुंचने पर भगवान शंकर ने उस वन में पुरुषों के प्रवेश करते ही उनके स्त्री होने का श्राप दे दिया था.

सुद्युम्न पहुंचे तो वे भी स्त्री बन गए. जो घूमते हुए बुध के आश्रम पहुंच गई. यहां दोनों एक दूसरे के आकर्षण में वैवाहिक संबंध में बंध गए, जिनसे पुरुरवा का जन्म हुआ. बहुत समय बीतने के बाद जब उस स्त्री को अपना पहला वृतांत याद आया तो वह दुखी होकर गुरुदेव वशिष्ठ के आश्रम चली गई.

जहां उसने गुरु वशिष्ठ के सामने फिर से पुरुष रूप पाने की इच्छा जताई. जिसे सुन वशिष्ठ जी कैलाश पर गए और भगवान शिव से इसके लिए प्रार्थना की. भगवान शिव ने प्रसन्न होकर सुद्युम्न के एक महीने स्त्री व एक महीने पुरुष रहने का वरदान दे दिया.

इसके बाद गुरु वशिष्ठ ने उनके साथ विराजी मां पार्वती की पूजा की तो उन्होंने प्रसन्न होकर सुद्युम्न को श्रीमद्देवी भागवत कथा का विधिपूर्वक श्रवण करने की प्रेरणा दी. इस पर सुद्युम्न ने अश्विनी महीने के इसी नवरात्रि में श्रीमद्देवी भागवत कथा को सुन उसके प्रभाव से सदा के लिए पुरुष रूप प्राप्त किया.

Tags: Dharma Aastha, Dharma Culture, Durga Pooja, Navaratri, Navratri, Navratri festival, Religious

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