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Navratri 2022: नवरात्रि व्रत करने से क्या होते हैं लाभ? पढ़ें निर्धन वैश्य के जीवन बदलने वाली कथा

नवरात्रि में श्रीमद् देवी भागवत पुराण का बड़ा महत्व है.

नवरात्रि में श्रीमद् देवी भागवत पुराण का बड़ा महत्व है.

नवरात्रि काल में मां भगवती की उपासना से साधक धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है. सांसारिक व पारलौकिक सुख भी ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

मां भगवती की उपासना से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
निर्धन वैश्य नवरात्रि व्रत करने से धन और धान्य से समृद्धि हो गया.

Navratri 2022: हिंदू शास्त्रों में नवरात्रि को शक्ति, भक्ति और मुक्ति का काल माना गया है. पुराणों के अनुसार इस काल में मां भगवती की उपासना से साधक धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है. सांसारिक व पारलौकिक सुख भी उसके अधीन हो जाते हैं. भयानक दरिद्रता भी दूर हो जाती है. इस संबंध में श्रीमद्देवी भागवत पुराण में एक गरीब वैश्य सुशील की कथा का भी जिक्र है, जिसके नवरात्रि करने पर उसके परिवार की सारी दरिद्रता दूर होकर मां भगवती की कृपा से उसे हर सुख प्राप्त हो गए. आज हम आपको उसी कथा के बारे में बताने जा रहे हैं.

नवरात्रि के प्रसंग में गरीब सुशील की कथा
पंडित रामचंद्र जोशी के अनुसार, श्रीमद्देवी भागवत पुराण में व्यास ऋषि व अभिमन्यु वंश के राजा जनमेजय की वार्ता का उल्लेख है. इसी वार्ता में व्यासजी द्वारा जनमेजय को सुशील की कथा सुनाई गई है. जिसमें व्यासजी कहते हैं कि प्राचीन समय में सुशील नाम का एक गरीब वैश्य था. कौशल देश के एक सज्जन ने उसका विवाह करवा दिया. जिसके बाद उसके बहुत से बच्चे हुए, लेकिन उसके परिवार की भूख कभी शांत नहीं होती. भूखा रहकर भी वह हमेशा धर्म व सत्य के मार्ग पर चलता.

सदाचार का पालन करता हुआ वह दूसरों का काम करता. क्रोध व झूठ से दूर रहता. जो कुछ खाने को मिलता, उसमें से ही देवताओं, अतिथि और पितरों को भोजन करवाकर बचा हुआ भोजन खुद खाता था. यही उसका प्रतिदिन का नियम था. एक बार अपनी गरीबी से दुखी होकर उसने एक शांत मुनि से अपनी दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा.

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उसने कहा कि वह धन तो नहीं चाहता, लेकिन भूख से रोते बच्चे घर छोड़कर चले गए हैं और कन्या के विवाह की चिंता भी उसे हमेशा सताती रहती है. ऐसे में परिवार के गुजर- बसर जितना धन भी आ जाए तो उसके लिए पर्याप्त है.

इस पर मुनि ने सुशील को भगवान राम द्वारा नवरात्रि करने का वृतान्त व फल बताते हुए सुशील को भी विधिपूर्वक नवरात्रि में मां भगवती के पूजन, हवन व भोजन की सलाह दी. जिसे सुन सुशील ने उन मुनि को ही अपना गुरू बनाकर उनसे माया बीज नामक भुवनेश्वरी मंत्र की दीक्षा ले ली.

फिर श्रद्धा से उसने नवरात्रि पूजा शुरू कर दी. इससे 9वें वर्ष के नवरात्रि में अष्टमी पर मां भगवती ने उसे दर्शन दिए और विभिन्न प्रकार के वर देकर उसकी सारी परेशानी दूर कर दी.

Tags: Dharma Aastha, Dharma Culture, Durga Pooja, Navaratri, Navratri, Religious

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