Onam 2020: ऐसे की जाती है ओणम महोत्सव की तैयारी, 12 दिनों तक होता है ये काम

Onam 2020: ऐसे की जाती है ओणम महोत्सव की तैयारी, 12 दिनों तक होता है ये काम
ओणम महोत्सव के पहले दिन केरलवासी भोर में ही सुबह उठकर स्नान कर पर्व की तैयारियों में लग जाते हैं.

दस दिवसीय ओणम (Onam) महोत्सव का दसवां व अंतिम दिन बहुत ही खास होता है. इसे थिरुवोणम (Thiruvonam) कहते हैं.

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  • Last Updated: August 19, 2020, 11:28 AM IST
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ओणम (Onam) महापर्व दक्षिण भारत के राज्य केरल में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. यह केरल का सबसे प्रमुख पर्व है. दस दिवसीय इस महोत्सव का दसवां व अंतिम दिन बहुत ही खास होता है. इसे थिरुवोणम (Thiruvonam) कहते हैं. मलयालम कैलेंडर के अनुसार, जब चिंगम माह में श्रावण/थिरुवोणम नक्षत्र प्रबल होता है, तब थिरुओणम की पूजा की जाती है. वर्ष 2020 में ये खास पर्व शुक्रवार, 21 अगस्त से शुरू होकर, 2 सितंबर तक चलेगा. हालांकि ओणम का मुख्य पर्व सोमवार, 31 अगस्त को मनाया जाएगा. आइए आपको बताते हैं कि दस दिवसीय ओणम महोत्व की तैयारी कैसे की जाती है. इस महापर्व में किस दिन क्या मनाया जाता है.

1. प्रथम दिन: एथम/अथम
ओणम महोत्सव के पहले दिन केरलवासी भोर में ही सुबह उठकर स्नान-आदि कर, पर्व की तैयारियों में लग जाते हैं. इसके बाद वो राजा बलि के मंदिर जाकर, उनकी पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लेते हैं. हर घर में विशेष तौर से सुबह के नाश्ते के लिए केले और फ्राई किए हुए पापड़ बनाए जाते हैं. मान्यता अनुसार कई लोग इसी भोजन को 13 दिनों तक भी गृहण करते हैं. इसके बाद ओणम की एक खास परंपरा निभाई जाती हैं, जिसमें लोग अपने घरों पर ही ओणम पुष्प कालीन बनाते हैं जिसे मलयालम में पूकलम कहा जाता है.

2. दूसरा दिन: चिथिरा
ओणम महोत्सव के द्वितीय दिन भी, हर घर में पूजा-अर्चना की जाती है. पूजा के बाद परंपरागत तरीके से जहां घर के पुरुष नए फूलों को लेकर आते हैं तो वहीं घर की सभी महिलाओं द्वारा परंपरागत तरीके से, उन फूलों से पुष्प कालीन का कार्य शुरू किया जाता है.



3. तीसरा दिन: चोधी
ओणम महोत्सव का तीसरा दिन विशेष तौर पर खरीदारी का होता है क्योंकि इस दौरान थिरुवोणम यानी ओणम पर्व को हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए, घर की महिलाएं और बड़े बाजारों से पूजा सामग्री और अन्य वस्तु लेकर आते हैं. माना जाता है कि इस दिन खरीदारी करना शुभ होता है.

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4. चौथा दिन: विसाकम
इस उत्सव के चौथे दिन, केरल राज्य में कई जगहों पर परंपरागत रूप से फूलों की कालीन बनाने की प्रतियोगिता का आयोजन होता है जिसमें वहां के लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं. वहीं महिलाओं द्वारा राजा बलि के आने की खुशी में, ओणम के दसवे दिन के लिए अलग-अलग पकवान जैसे अचार, आलू की चिप्स, केले के पापड़ बनाने की तैयारी शुरू की जाती है. इन्हीं पकवानों को ओणम की पूजा के बाद अंतिम दिन पर लोगों और रिश्तेदारों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.

5. पांचवां दिन: अनिजाम
पांचवें दिन, मुख्य रूप से केरल की वल्लमकली परंपरा निभाई जाती है जिसमें नौका दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होता है. ये प्रतियोगिता देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लोगों के बीच आकर्षण का केन्द्र बिंदु होती है.

6. छठा दिन: थ्रिकेता
उत्सव के छठे दिन केरल के लोग कई तरह के कार्यक्रमों में भाग लेते हुए अपनी कला और संस्कृती का प्रदर्शन करते हैं. इस दौरान वो लोकगीत गाते हुए नत्य कर, अपने आराध्य राजा बलि का शुक्रिया अदा करते हैं. इसमें हर वर्ग और हर उम्र के लोग हिस्सा लेते हुए, पर्व को मनाते हैं. ये एक दूसरे को ओणम पर्व की बधाई देने का, केरल का परंपरागत तरीका माना जाता है.

7. सातवां दिन: मूलम
ओणम उत्सव का सातवां दिन, घरों की सजावट जैसे कार्यों के लिए होता है. घर की महिलाएं घरों की अच्छे से साफ-सफाई कर, उन्हें अलग-अलग सामग्री और रंगोली से सजाती हैं. इसलिए इस दिन आप सभी बाजारों और घरों को सुंदर सजे हुए देख सकते हैं. कई जगहों पर खास तौर से मेलों का आयोजन भी किया जाता है.

8. आठवां दिन: पूरादम
ओणम महाउत्सव के आठवें दिन, परंपरा के अनुसार लोग ताजी मिट्टी से निर्मित पिरामिड के आकार में मूर्तियों का निर्माण करते हैं. इन सभी पिरामिड मूर्तियों को केरल के लोग माँ के नाम से संबोधित करते हुए, उन्हें अपने पूजा स्थान पर स्थापित करते हैं. इस दौरान पूजा स्थान की अच्छे से सफाई कर, उस पर पुष्प और अन्य पूजा सामग्री भी अर्पित की जाती है.

9. नौवां दिन: उथिरादम
उत्सव का नौवां दिन, प्रथम ओणम के नाम से जाना जाता है. इस दिन लोग हर्षोल्लास और खुशियों के साथ राजा महाबलि की प्रतीक्षा करते हैं. इसके लिए राजा महाबलि का विधिवत पूजन कर, सारी तैयारी पूरी की जाती है. घर के मुख्य द्वार पर विशाल पुष्प कालीन, भगवान के स्वागत में बिछाई जाती है जिसे घर की महिलाएं खुद अपने हाथों से तैयार करती हैं.

10. दसवां दिन: थिरुवोणम
पर्व का दसवां दिन विशेष रूप से राजा महाबलि के आगमन का दिन होता है, जिसे दूसरा ओणम भी कहा जाता है. इस दौरान लोग एक-दूसरे को स्वादिष्ट पकवान खिलाते हुए, उन्हें ओणम पर्व की बधाई देते हैं. महिलाओं द्वारा पुष्प कालीन की साज-सजावट का कार्य भी किया जाता है. साथ ही ओणम के परंपरागत पकवानों से थालियों को सजाते हुए, साध्या को तैयार किया जाता है. फिर रात के समय आसमान में जमकर आतिशबाजी कर, लोग इस महापर्व को मनाते हैं.

11. ग्यारवां दिन: अविट्टम
ग्यारवां दिन, तीसरा ओणम भी कहलाता है, जिसमें लोग अपने राजा की पृथ्वी लोक से पाताल लोक के लिए विदाई की तैयारी करते हैं. इस दौरान अपने रीति-रिवाज अनुसार, ओनथाप्पन मूर्ति को नदी अथवा सागर में प्रवाह किया जाता है. इससे पहले भगवान की ये मूर्ति, लोग अपने-अपने घरों में पुष्प कालीन के बीच दस दिनों तक रखते हैं. मूर्ति को प्रवाह करने के बाद जहां कई लोग पुष्प कालीन को हटाकर, घर की दोबारा साफ-सफाई करते हैं तो वहीं कुछ लोगों द्वारा उसे थिरुवोणम पर्व के बाद भी 28 दिनों तक अपने घरों में रखा जाता है.

12. बाहरवां दिन: चथ्यम
बाहरवें दिन के साथ ही, ओणम महोत्सव समारोह का समापन होता है. इस दौरान केरल के लोग विशाल नृत्य कार्यक्रम कर अपनी संस्कृती का प्रदर्शन करते हुए, राजा बलि का धन्यवाद करते हैं. (साभार- Astrosage.com)
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