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Padmini Ekadashi 2020: पद्मिनी एकादशी व्रत रविवार को, जानें संपूर्ण पूजा विधि, मुहूर्त और महत्व

पद्मिनी एकादशी सभी व्रतों में श्रेष्ठ मानी जाती है
पद्मिनी एकादशी सभी व्रतों में श्रेष्ठ मानी जाती है

पद्मिनी एकादशी 2020 (Padmini Ekadashi 2020 Date And Timing):श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर और अर्जुन को एकादशी के व्रत की महिमा का बखान किया था. एकादशी दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित है. अधिकमास (Adhik Maas) की तरह ये एकादशी (Ekadashi) भी 3 साल में एक बार आती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 6:51 AM IST
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पद्मिनी एकादशी 2020 (Padmini Ekadashi 2020 Date And Timing): हिंदू पंचांग के अनुसार, पद्मिनी एकादशी 27 सितंबर 2020 रविवार यानी कि कल है. पद्मिनी एकादशी को कमला एकादशी भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी सभी व्रतों में श्रेष्ठ मानी जाती है. पद्मिनी एकादशी अधिकमास (Adhik Maas) में पड़ती है और हिंदू धर्म में इसकी महिमा का अपरंपार बखान किया गया है. महाभारत काल की मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर और अर्जुन को एकादशी के व्रत की महिमा का बखान किया था. अधिकमास और एकादशी दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित है.

पद्मिनी एकादशी शुभ मुहूर्त प्रारंभ:
एकादशी तिथि की शुरुआत आज , 26 सितम्बर को शाम : 06 बजकर 59 मिनट से होगी
एकादशी तिथि का समापन : 27 सितम्बर को शाम 07 बजकर 46 मिनटपर होगा.
पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण मुहूर्त: 28 सितंबर 2020 को प्रात: 06 बजकर 12 मिनट 41 सेकेंड से प्रात: 08 बजकर 36 मिनट 09 सेकेंड तक.



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पद्मिनी एकादशी की पूजा विधि:
पद्मिनी एकादशी पर 27 सितंबर 2020 को सुबह नित्यकर्म और स्नान के बाद पूजाघर में कुश के आसन पर बैठकर व्रत का संकल्प लें और भगवन विष्णु की पूजा करें. पूजा के बाद विष्णु पुराण पढ़ें. पूरे दिन निराहार व्रत रहें. फलाहार कर सकते हैं. रात्रि के पहर में भी भगवान विष्णु की आराधना और भजन करें. अगले दिन सुबह एकादशी व्रत का विधिवत पारण करें. ऐसा करने से ही व्रत का सम्पूर्ण लाभ प्राप्त होगा.

पद्मिनी एकादशी का महत्व:
अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी लक्ष्मीपति भगवान विष्णु को समर्पित है. पद्मिनी एकादशी पर भक्त भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना करते हैं. मान्यता है कि जो जातक यह व्रत करता है उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है और उनके दुखों का नाश होता है. वह ख़ुशी ख़ुशी जीवन जीता है और बाद में स्वर्ग की प्राप्ति होती है. अधिकमास की तरह ये एकादशी भी 3 साल में एक बार आती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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