Padmini Ekadashi 2020: पद्मिनी एकादशी को इस शुभ मुहूर्त में करें विष्णु जी की पूजा, पढ़ें प्राचीन व्रत कथा

पद्मिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से पद्मिनी और कृतवीर्य को संतान की प्राप्ति हुई.
पद्मिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से पद्मिनी और कृतवीर्य को संतान की प्राप्ति हुई.

Padmini Ekadashi 2020: पद्मिनी और कृतवीर्य ने 10 हजार साल तक तप किया, फिर भी पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई. इसी बीच अनुसूया ने पद्मिनी से मलमास के बारे में बताया. उसने कहा कि मलमास 32 माह के बाद आता है और सभी मासों में महत्वपूर्ण माना जाता है.

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  • Last Updated: September 27, 2020, 6:40 AM IST
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Padmini Ekadashi 2020: आज पद्मिनी एकादशी है. भक्तों ने भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए निर्जला व्रत रखा है और कुछ भक्त फलाहार करते हुए उपवास करेंगे. पद्मिनी एकादशी को कमला एकादशी भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी सभी व्रतों में श्रेष्ठ मानी जाती है. पद्मिनी एकादशी अधिकमास (Adhik Maas) में पड़ती है और हिंदू धर्म में इसकी महिमा का अपरंपार बखान किया गया है.

पद्मिनी एकादशी शुभ मुहूर्त
एकादशी  प्रारम्भ – सितम्बर 26, 2020 को 06:59 पी एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – सितम्बर 27, 2020 को 07:46 पी एम बजे
पद्मिनी एकादशी पारण मुहूर्त: 06:10:41 से 08:26:09 तक



पद्मिनी एकादशी व्रत कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार त्रेयायुग में महिष्मती पुरी के राजा थे कृतवीर्य. वे हैहय नामक राजा के वंश थे. कृतवीर्य की एक हजार ​पत्नियां थीं, लेकिन उनमें से किसी से भी कोई संतान न थी. उनके बाद महिष्मती पुरी का शासन संभालने वाला कोई न था. इसको लेकर राजा परेशान थे. उन्होंने हर प्रकार के उपाय कर लिए लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. इसके बाद राजा कृतवीर्य ने तपस्या करने का निर्णय लिया. उनके साथ उनकी एक पत्नी पद्मिनी भी वन जाने के लिए तैयार हो गईं. राजा ने अपना पदभार मंत्री को सौंप दिया और योगी का वेश धारण कर पत्नी पद्मिनी के साथ गंधमान पर्वत पर तप करने निकल पड़े.

कहा जाता है कि पद्मिनी और कृतवीर्य ने 10 हजार साल तक तप किया, फिर भी पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हुई. इसी बीच अनुसूया ने पद्मिनी से मलमास के बारे में बताया. उसने कहा कि मलमास 32 माह के बाद आता है और सभी मासों में महत्वपूर्ण माना जाता है. उसमें शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने से तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी. श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होकर तुम्हें पुत्र रत्न अवश्य देंगे. पद्मिनी ने मलमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत विधि विधान से किया. इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया. उस आशीर्वाद के कारण पद्मिनी के घर एक बालक का जन्म हुआ, जिसका नाम कार्तवीर्य रखा गया. पूरे संसार में उनके जितना बलवान कोई न था. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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