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Pauranik Katha: भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी को क्यों दिया था श्राप? पढ़ें यह पौराणिक कथा

Pauranik Katha: भगवान विष्णु ने माता लक्ष्मी को क्यों दिया था श्राप? पढ़ें यह पौराणिक कथा

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पौराणिक कथा

भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पौराणिक कथा

Pauranik Katha: आज शुक्रवार (Friday) का दिन माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) की पूजा के लिए समर्पित है. कोई नहीं चाहता कि माता लक्ष्मी उससे नाराज हो जाएं. हालांकि एक बार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) माता लक्ष्मी से नाराज हो गए थे.

    Pauranik Katha: आज शुक्रवार (Friday) का दिन माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) की पूजा के लिए समर्पित है. आज लोग माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के उपाय करते हैं. जिन पर माता लक्ष्मी की कृपा हो जाती है, वह धन धान्य से परिपूर्ण हो जाता है. हर कोई उनका आशीर्वाद प्राप्त कर लेना चाहता है. कोई नहीं चाहता कि माता लक्ष्मी उससे नाराज हो जाएं. हालांकि एक बार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) माता लक्ष्मी से नाराज हो गए थे और उनको श्राप दे दिया था. आखिर ऐसा क्यों हुआ? पढ़ें यह पौराणिक कथा.

    जब माता लक्ष्मी को मिला श्राप

    एक समय की बात है माता लक्ष्मी एक सुंदर अश्व को देखने में इतनी ध्यानमग्न थीं, कि उन्होंने भगवान विष्णु की बातों पर ध्यान नहीं दिया. इससे क्रोधित होकर भगवान विष्णु ने उनको पृथ्वी लोक पर अश्वी बनने का श्राप दे दिया. इससे माता लक्ष्मी दुखी हो गईं, तो भगवान विष्णु ने कहा कि आपको कुछ समय के लिए अश्व की योनी में रहना होगा. फिर आपको एक पुत्र होगा. उसके बाद ही उस योनी से मुक्ति मिलेगी.

    यह भी पढ़ें: माता लक्ष्मी के हैं 8 स्वरूप, सबकी अलग है महिमा

    जब समय आया तो माता लक्ष्मी पृथ्वी पर अश्व की योनी में जीवन व्यतीत करने लगीं. उन्होंने काफी समय तक भगवान शिव की आराधना की. अपने तप से उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न किया. भगवान शिव ने कहा कि आपके पति भगवान विष्णु इस पूरे संसार के पालनहार हैं. एक स्त्री का पति ही उसका भगवान होता है. आपको केवल भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए.

    इस पर माता लक्ष्मी ने कहा कि आप में और श्रीहरि में कोई भेद नहीं हैं. बस दोनों का स्वरूप अलग अलग है. आप यह दुख दूर कीजिए ताकि वह अश्व की योनी से मुक्त हों. इस पर प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको आशीष दिया और भगवान विष्णु को पृथ्वी लोक पर जाने के बारे में अवगत कराने का वचन दिया.

    यह भी पढ़ें: स्वर्ग छोड़कर क्यों चली गईं माता लक्ष्मी? पढ़ें यह पौराणिक कथा

    कुछ समय बाद भगवान विष्णु ने अश्व रुप में अवतार लिया और माता लक्ष्मी के साथ अश्व योनी में समय व्यतीत किया. माता लक्ष्मी ने कुछ समय बाद एकवीर नामक पुत्र को जन्म दिया. उसके फलस्वरूप माता लक्ष्मी श्राप से मुक्त होकर वैकुंठ धाम चली गईं. एकवीर से हैहय वंश की उत्पत्ति हुई.

    Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu

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