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Paush Month 2021: पौष मा​ह का प्रारंभ कल से, जानें क्या हैं इसके 5 धार्मिक महत्व

Paush Month 2021: पौष मा​ह का प्रारंभ कल से, जानें क्या हैं इसके 5 धार्मिक महत्व

मार्गशीर्ष माह के समापन के बाद पौष माह आता है.

मार्गशीर्ष माह के समापन के बाद पौष माह आता है.

Paush Month 2021: पंचांग (Panchang) का नया माह पौष का प्रारंभ कल 20 दिसंबर दिन सोमवार से हो रहा है. मार्गशीर्ष माह के समापन के बाद पौष माह आता है. पौष को आमबोलचाल की भाषा में पूस माह भी कहते हैं.

    Paush Month 2021: पंचांग (Panchang) का नया माह पौष का प्रारंभ कल 20 दिसंबर दिन सोमवार से हो रहा है. मार्गशीर्ष माह के समापन के बाद पौष माह आता है. पौष को आमबोलचाल की भाषा में पूस माह भी कहते हैं. पौष माह हिन्दू कैलेंडर का 10वां माह होता है. य​​ह माह धार्मिक दृष्टिकोट से काफी महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस समय में खरमास चल रहा है और सूर्य एवं बृहस्पति का प्रभाव कम रहता है. इस वजह से सूर्य और गुरु की नियमित पूजा की जाती है. पौष माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है. पौष माह का प्रारंभ 20 दिसंबर 2021 से होकर समापन पौष पूर्णिमा पर 17 जनवरी 2022 को होगा. आइए जानते हैं पौष मा​ह के महत्व के बारे में.

    पौष माह का धार्मिक महत्व

    1. पौष माह में दो महत्वपूर्ण एकादशी आती है. सफला एकादशी और पुत्रदा एकादशी. पौष माह में सफला एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होते हैं. जो लोग संतानहीन हैं, उनके लिए पौष पुत्रदा एकादशी होती है. इसका व्रत रखने और भगवान विष्णु की कृपा से संतानहीन दंपत्ति को पुत्र की प्राप्ति होती है.

    2. पौष माह में भानु सप्तमी व्रत है. जब किसी माह की सप्तमी तिथि रविवार को होती है, तो वह भानु सप्तमी होती है. भानु सप्तमी के दिन सूर्य उपासना से सभी संकट मिट जाते हैं.

    3. खरमास का समापन भी पौष माह में होता है. खरमास के समापन के साथ ही मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई आदि होने शुरु होते हैं.

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    4. मकर संक्रांति का पर्व भी पौष माह में आता है. इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है. इस दिन नदी स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है. इस दिन तिल और चावल के दान का बड़ा महत्व है.

    5. पौष माह में ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं. मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसके बाद से दिन बड़ा और रात छोटी होने लगती है. सूर्य के उत्तरायण की स्थिति को देवताओं का दिन कहा जाता है. इससे जुड़ी एक और मान्यता है कि जिनकी मृत्यु सूर्य के उत्तरायण स्थिति में होती है, उनको मोक्ष मिलता है.

    6. पौष माह में ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार क्रिसमस डे आता है. इस दिन ईसा मसीह का जन्मदिन मनाया जाता है. क्रिसमस डे हर साल 25 दिसंबर को मनाते हैं.

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    पौष माह में क्या करें और क्या न करें
    1. पौष माह में प्रत्येक दिन सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए.
    2. पौष माह में तिल, गुड़ और घी का सेवन करना चाहिए.
    3. पौष का माह अत्यधिक सर्दी वाला होता है, इसलिए ठंडी तासीर वाली चीजें खाने से बचें.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

    Tags: Dharma Aastha, धर्म

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