अपना शहर चुनें

States

Paush Purnima 2021: पौष पूर्णिमा को करें मां दुर्गा के शांकभरी रूप की पूजा, पढ़ें कथा

पौष पूर्णिमा को शाकंभरी पूर्णिमा भी कहते हैं.  (credit: instagram/divasphotography)
पौष पूर्णिमा को शाकंभरी पूर्णिमा भी कहते हैं. (credit: instagram/divasphotography)

पौष पूर्णिमा 2021 (Paush Purnima 2021): मां दुर्गा (Maa Durga) ने पौष पूर्णिमा के दिन अपने भक्तों के कल्याण के लिए शांकभरी (Devi Shakambari) का अवतार धारण किया था. मां शांकभरी को वन देवी भी कहा जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 28, 2021, 6:40 AM IST
  • Share this:
पौष पूर्णिमा 2021 (Paush Purnima 2021): आज पौष पूर्णिमा है. इसे शाकंभरी पूर्णिमा भी कहते हैं. आज भक्त मां दुर्गा के शांकभरी स्वरुप की पूजा-अर्चना करेंगे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा ने पौष पूर्णिमा के दिन अपने भक्तों के कल्याण के लिए शांकभरी का अवतार धारण किया था. मां शांकभरी को वन देवी भी कहा जाता है. शांकभरी देवी का वर्णन सब्जियों और फलों की देवी के रूप में मिलता है. कुछ लोग इस दिन मां दुर्गा की भी पूजा करेंगे . आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा की पौराणिक कथा...

पौष पूर्णिमा की पौराणिक कथा:

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय जब पृथ्‍वी पर दुर्गम नामक दैत्य ने आतंक का माहौल पैदा किया. इस तरह करीब सौ वर्ष तक वर्षा न होने के कारण अन्न-जल के अभाव में भयंकर सूखा पड़ा, जिससे लोग मर रहे थे. जीवन खत्म हो रहा था.



Also Read: Paush Purnima 2021: पौष पूर्णिमा पर इस शुभ मुहूर्त में करें स्नान, गुरु पुण्य योग पूरी करेगा मनोकामनाएं


उस दैत्य ने ब्रह्माजी से चारों वेद चुरा लिए थे. तब आदिशक्ति मां दुर्गा का रूप मां शाकंभरी देवी में अवतरित हुई, जिनके सौ नेत्र थे. उन्होंने रोना शुरू किया, रोने पर आंसू निकले और इस तरह पूरी धरती में जल का प्रवाह हो गया. अंत में मां शाकंभरी दुर्गम दैत्य का अंत कर दिया.

Also Read: Sakat Chauth 2021 Date: कब है सकट चौथ? जानें तारीख और गणपति पूजन की व्रत एवं पूजा विधि 

एक अन्य कथा:

पौष पूर्णिमा को लेकर एक अन्य कथा के अनुसार शाकंभरी देवी ने 100 वर्षों तक तप किया था और महीने के अंत में एक बार शाकाहारी भोजन कर तप किया था. ऐसी निर्जीव जगह जहां पर 100 वर्ष तक पानी भी नहीं था, वहां पर पेड़-पौधे उत्पन्न हो गए. यहां पर साधु-संत माता का चमत्कार देखने के लिए आए और उन्हें शाकाहारी भोजन दिया गया. इसका तात्पर्य यह था कि माता केवल शाकाहारी भोजन का भोग ग्रहण करती हैं और इस घटना के बाद से माता का नाम शाकंभरी माता पड़ा. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज