Pitru Paksha 2020 Date: इस दिन से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें श्राद्धकर्म की विधि और मंत्र

Pitru Paksha 2020 Date: इस दिन से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष, जानें श्राद्धकर्म की विधि और मंत्र
पितृ पक्ष में पितृ तर्पण और श्राद्ध करने का विधान है.

भारतीय धर्मशास्त्र और कर्मकांड के अनुसार पितर देव (God) स्वरूप होते हैं. इस पक्ष में पितरों के निमित्त दान, तर्पण, श्राद्ध के रूप में श्रद्धापूर्वक जरूर करना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2020, 6:54 AM IST
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पितृ पक्ष 2020 (Pitru Paksha 2020): भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 1 और 2 सितंबर को है. इस दिन अगस्त्य मुनि का तर्पण (Tarpan) करने का शास्त्रीय विधान है. इस वर्ष इस साल पितृ पक्ष 1 सितंबर 2020 से शुरू होकर 17 सिंतबर तक चलेगा. पितृ पक्ष एक महत्वपूर्ण पक्ष है. भारतीय धर्मशास्त्र और कर्मकांड के अनुसार पितर देव (God) स्वरूप होते हैं. इस पक्ष में पितरों के निमित्त दान, तर्पण, श्राद्ध के रूप में श्रद्धापूर्वक जरूर करना चाहिए. पितृपक्ष में किया गया श्राद्ध-कर्म सांसारिक जीवन को सुखमय बनाते हुए वंश की वृद्धि भी करता है. इतना ही नहीं कहा जाता है कि पितृपक्ष में किया गया श्राद्ध कर्म श्राद्ध के फल को प्रदान करता हैं- 'पितृपक्षे पितर श्राद्धम कृतम येन स गया श्राद्धकृत भवेत।'

क्या होता है पितृदोष
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार श्राद्ध न करने से पितृदोष लगता है. श्राद्धकर्म-शास्त्र में उल्लिखित है-श्राद्धम न कुरूते मोहात तस्य रक्तम पिबन्ति ते अर्थात् मृत प्राणी बाध्य होकर श्राद्ध न करने वाले अपने सगे-सम्बंधियों का रक्त-पान करते हैं. उपनिषद में भी श्राद्धकर्म के महत्व का प्रमाण मिलता है- देवपितृकार्याभ्याम न प्रमदितव्यम अर्थात् देवता और पितरों के कार्यों में आलस्य मनुष्य को कदापि नहीं करना चाहिए.

पितृपक्ष में तर्पण और श्राद्ध विधि
पितृपक्ष में पितृ तर्पण और श्राद्ध करने का विधान यह है कि सर्वप्रथम हाथ में कुशा, जौ, काला तिल, अक्षत् और जल लेकर संकल्प करें- ॐ अद्य श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त सर्व सांसारिक सुख-समृद्धि प्राप्ति च वंश-वृद्धि हेतव देवऋषिमनुष्यपितृतर्पणम च अहं करिष्ये. इसके बाद पितरों का आवाहन इस मंत्र से करना चाहिए- ब्रह्मादय:सुरा:सर्वे ऋषय:सनकादय:.. आगच्छ्न्तु महाभाग ब्रह्मांड उदर वर्तिन:.



इसके बाद इस मंत्र से पितरों को तीन अंजलि जल अवश्य दे- ॐआगच्छ्न्तु मे पितर इमम गृहणम जलांजलिम अथवा मम (अमुक) गोत्र अस्मत पिता-उनका नाम- वसुस्वरूप तृप्यताम इदम तिलोदकम तस्मै स्वधा नम:.

पितर प्रार्थना मंत्र
मान्यता है कि पितर तर्पण के बाद गाय और बैल को हरा साग खिलाना चाहिए. इसके बाद पितरों की इस मंत्र से प्रार्थना करनी चाहिए- ॐ नमो व:पितरो रसाय नमो व:पितर: शोषाय नमो व:पितरो जीवाय नमो व:पितर:स्वधायै नमो व:पितरो घोराय नमो व:पितरो मन्यवे नमो व:पितर:पितरो नमो वो गृहाण मम पूजा पितरो दत्त सतो व:सर्व पितरो नमो नम:.

श्राद्ध कर्म मंत्र
पितृ तर्पण के बाद सूर्यदेव को साष्टांग प्रणाम करके उन्हें अर्घ्य देना चाहिए. इसके बाद भगवान वासुदेव स्वरूप पितरों को स्वयं के द्वारा किया गया श्राद्ध कर्म इस मंत्र से अर्पित करें- अनेन यथाशक्ति कृतेन देवऋषिमनुष्यपितृतरपण आख्य कर्म भगवान पितृस्वरूपी जनार्दन वासुदेव प्रियताम नमम. ॐ ततसद ब्रह्मा सह सर्व पितृदेव इदम श्राद्धकर्म अर्पणमस्तु. ॐविष्णवे नम:, ॐविष्णवे नम:, ॐविष्णवे नम:. इसे तीन बार कहकर तर्पण कर्म की पूर्ति करना चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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