Pohela Boishakha 2021: आज है बंगाली नववर्ष का पहला दिन, जानें क्यों कहते हैं इसे पोइला बोइशाख

इस दिन बंगाली लोग नए कपड़े पहनते हैं और कई तरह के पकवान बनाकर मेहमानों को पेश करते हैं. Image-shutterstock.com

इस दिन बंगाली लोग नए कपड़े पहनते हैं और कई तरह के पकवान बनाकर मेहमानों को पेश करते हैं. Image-shutterstock.com

Pohela Boishakha 2021: पोइला बोइशाख के दिन बंगाली लोग अपने घरों को साफ करते हैं. फिर स्नान कर नए कपड़े पहनकर पूजा पाठ किया जाता है. इस दिन व्यापारी भी नया लेखा-जोखा की शुरुआत करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 7:29 AM IST
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Bengali New Year (Pohela Boishakha) 2021: हर साल चैत्र का महीना खत्म होते ही बंगाली नववर्ष मनाया जाता है. इस साल बंगाली नववर्ष आज मनाया जा रहा है. बंगाल में इसे पोइला बोइशाख के नाम से जाना जाता है. ये वैशाख माह का पहला दिन होता है. इस दौरान बंगाली लोग एक दूसरे को नए साल की बधाई देते हैं. वहीं शुभो नोबो बोरसो बोलकर शुभकामना दी जाती है. शुभो नोबो बरसो का अर्थ होता है- नया साल मुबारक हो. मान्यता है कि बंगाल में वैशाख का महीना काफी शुभ होता है. इस समय सारे शुभ काम किए जाते हैं, जिसमें नया बहीखाता शुरू करने से लेकर शादी-विवाह, गृह-प्रवेश, मुंडन, घर खरीदने जैसे कार्य शामिल हैं. इस दिन बंगाली लोग नए कपड़े पहनते हैं और कई तरह के पकवान बनाकर मेहमानों को पेश करते हैं. साथ ही कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. हालांकि इस साल कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई प्रकार के सख्त नियम बनाए गए हैं.

पोइला बोइशाख के दिन बंगाली लोग अपने घरों को साफ करते हैं. फिर स्नान कर नए कपड़े पहनकर पूजा पाठ किया जाता है. इस दिन व्यापारी भी नया लेखा-जोखा की शुरुआत करते हैं. सुबह पूजा करने के बाद घर पर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं. बंगाल में इस दिन परिवार की समृद्धि और भलाई के लिए पूजा की जाती है. इस दिन घर सजाना, मंदिर जाना, बड़ों का आशीष लेने की परंपरा है. पोइला बोइशाख में मां भगवती की पूजा की भी जाती है. भगवती यानी गौ माता. सुबह गौ माता को स्नान कराकर उन्हें तिलक लगाया जाता है. उसके बाद गाय को भोग लगाकर उनका पांव छूकर आशीर्वाद लिया जाता है.

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पोइला बोइशाख शुभ मूहूर्त
बंगाली युग 1428 प्रारम्भ

पोइला बोइशाख आरंभ- 15 अप्रैल, 2021 (गुरुवार)

वहीं बंगाल के कई जगहों पर इस दिन मेले का आयोजन भी किया जाता है. पारंपरिक कपड़ों में सजे धजे लोग इस मेले में शामिल होते हैं. कई गांव में गोष्ठी मेले का भी आयोजन किया जाता है. लोग अपने घरों से राधा-कृष्ण की मूर्ति को लेकर गोष्ठी मंडप पर पहुंचते हैं. फिर एकसाथ पूजा की जाती है. भजन कीर्तन किए जाते हैं. बांग्ला नववर्ष की सुबह पुआल जलाने का भी रिवाज है. लोग इस पुआल में अपने गुजरे साल के तमाम कष्टों की आहुति देते हैं.



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माना जाता है कि इससे पूरे साल घरों में खुशहाली बनी रहती है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूर्य को देखने की भी परंपरा है. मान्यता है कि ऐसा करना शुभ होता है. कई जगहों पर इस दिन लोग नाश्ते में प्याज, हरी मिर्ची और फ्राईड हिल्सा फिश के साथ पान्ता भात खाते हैं. बंगाली लोग पोइला बोइशाख के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं. पूरे साल अच्छी बारिश के लिए इस अवसर पर बादलों की भी पूजा की जाती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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