Pradosh Vrat 2020: बुध प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा की सटीक विधि और पढ़ें व्रत कथा

Pradosh Vrat 2020: बुध प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा की सटीक विधि और पढ़ें व्रत कथा
प्रदोष व्रत में व्रती भगवान शिव की पूजा करते हैं

बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat) : बुध प्रदोष व्रत करने से जातक की कुंडली में बुध और चंद्रमा ग्रहों की स्थिति भी मजबूत होती है...

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बुध प्रदोष व्रत (Budh Pradosh Vrat) : आज बुध प्रदोष व्रत है. प्रदोष व्रत रखने वाले भक्तों ने आज भगवान शिव को प्रसन्न करने की लिए व्रत रखा है. प्रदोष के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने की परंपरा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने वाले जातकों के सारे कष्ट, परेशानियां और बाधाएं कट जाती हैं और भोल शंकर भक्तों पर कृपा करते हैं. बुध प्रदोष व्रत करने से जातक की कुंडली में बुध और चंद्रमा ग्रहों की स्थिति भी मजबूत होती है.

प्रदोष व्रत  की पूजा-विधि:
प्रदोष व्रत के साधक को दिन सुबह सूर्योदय से पहले बिस्तर त्याग देना चाहिए. इसके बाद नहा-धोकर पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव का भजन कीर्तन और पूजा-पाठ करना चाहिए. इसके बाद पूजाघर में साफ-सफाई करनी चाहिए. इसके बाद पूजा के स्थान और पूरे घर में गंगाजल से पवित्रीकरण करना चाहिए. पूजाघर को गाय के गोबर से लीपना चाहिए. हिंदू धर्म में गाय के गोबर को काफी पवित्र माना गया है. यदि आप ऐसा नहीं भी करते हैं तो परेशानी की बात नहीं है.

बुध प्रदोष व्रत कथा:



पौराणिक कथा के अनुसार, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ था. वह गौने के बाद दूसरी बार पत्नी को लाने के लिये ससुराल पहुंचा और उसने सास से कहा कि बुधवार के दिन ही पत्नी को लेकर अपने नगर जायेगा.


उस पुरुष के सास-ससुर ने, साले-सालियों ने उसको समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं है, लेकिन वह पुरुष नहीं माना. विवश होकर सास-ससुर को अपने जमाता और पुत्री को भारी मन से विदा करना पड़ा.

पति-पत्नी बैलगाड़ी में चले जा रहे थे. एक नगर से बाहर निकलते ही पत्नी को प्यास लगी. पति लोटा लेकर पत्नी के लिये पानी लेने गया. जब वह पानी लेकर लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी पराये पुरुष के लाये लोटे से पानी पीकर, हंसी-ख़ुशी बात कर रही है. वह पराया पुरुष बिल्कुल इसी पुरुष के शक्ल-सूरत जैसा था. यह देखकर वह पुरुष दूसरे अन्य पुरुष से क्रोध में आग-बबूला होकर लड़ाई करने लगा. धीरे-धीरे वहाँ काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी.

इतने में एक सिपाही भी आ गया. सिपाही ने स्त्री से पूछा कि सच-सच बता तेरा पति इन दोनों में से कौन है? लेकिन वह स्त्री चुप रही क्योंकि दोनों पुरुष हमशक्ल थे.

बीच राह में पत्नी को इस तरह देखकर वह पुरुष मन ही मन शंकर भगवान की प्रार्थना करने लगा कि हे भगवान मुझे और मेरी पत्नी को इस मुसीबत से बचा लो, मैंने बुधवार के दिन अपनी पत्नी को विदा कराकर जो अपराध किया है उसके लिये मुझे क्षमा करो. भविष्य में मुझसे ऐसी गलती नहीं होगी.

श्री शंकर भगवान उस पुरुष की प्रार्थना से द्रवित हो गये और उसी क्षण वह अन्य पुरुष कही अंर्तध्‍यान हो गया. वह पुरुष अपनी पत्नी के साथ सकुशल अपने नगर को पहुंच गया. इसके बाद से दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक बुधवार प्रदोष व्रत करने लगे. बोलो उमापति शंकर भगवान की जय.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
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