Budh Pradosh Vrat 2021: आज है बुध प्रदोष व्रत, इस शुभ मुहूर्त में पूजा कर शिव जी को करें प्रसन्न, पढ़ें कथा

बुध प्रदोष व्रत में शिव और पार्वती की पूजा की जाती है.

Budh Pradosh Vrat 2021 In July: भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Maa Parvati) के आशीर्वाद के लिए प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) करें. इस व्रत से रोगों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है...

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    Budh Pradosh Vrat 2021 In July: आज बुध प्रदोष व्रत है. आज भक्त विधि विधान से प्रदोष काल में भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Maa Parvati) विधि विधान की पूजा-अर्चना करेंगे. आज के दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव सबसे आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं. उनसे ही जीवन है और उनसे ही मृत्यु है. वही महाकाल भी हैं. त्रयोदशी के दिन जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं उनको रोगों से मुक्ति मिलती है, जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है. दुखों और पाप का नाश होता है. जिन लोगों को कोई संतान नहीं होती है, उन लोगों को इस व्रत को करने से वंश वृद्धि के लिए संतान का आशीष मिलता है.आइए जानते हैं बुध प्रदोष के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और कथा...

    बुध प्रदोष व्रत मुहूर्त:
    आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ - 04:26 पी एम, जुलाई 21.
    आषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी समाप्त - 01:32 पी एम, जुलाई 22.
    प्रदोष काल- 07:18 पी एम से 09:22 पी एम.

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    बुध प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा:

    बुध प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ. विवाह के 2 दिनों बाद उसकी पत्‍नी मायके चली गई. कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्‍नी को लेने उसके यहां गया. बुधवार को जब वह पत्‍नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्‍न किया कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं होता. लेकिन वह नहीं माना और पत्‍नी के साथ चल पड़ा.

    नगर के बाहर पहुंचने पर पत्‍नी को प्यास लगी. पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा. पत्‍नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई. थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तब उसने देखा कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है. उसको क्रोध आ गया.

    वह निकट पहुंचा तो उसके आश्‍चर्य का कोई ठिकाना न रहा, क्योंकि उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी. पत्‍नी भी सोच में पड़ गई. दोनों पुरुष झगड़ने लगे. भीड़ इकट्ठी हो गई. सिपाही आ गए. हमशक्ल आदमियों को देख वे भी आश्‍चर्य में पड़ गए.

    उन्होंने स्त्री से पूछा 'उसका पति कौन है?' वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई. तब वह पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- 'हे भगवान! हमारी रक्षा करें. मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्‍नी को विदा करा लिया. मैं भविष्य में ऐसा कदापि नहीं करूंगा.'

    जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया. पति-पत्‍नी सकुशल अपने घर पहुंच गए. उस दिन के बाद से पति-पत्‍नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे. अत: बुध त्रयोदशी व्रत हर मनुष्य को करना चाहिए. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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