Pradosh Vrat 2021: आज है मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

Pradosh Vrat 2021: प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. इसे प्रदोष काल कहा जाता है.

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  • Last Updated: March 10, 2021, 6:21 AM IST
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Pradosh Vrat 2021: मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत आज है. वहीं 11 मार्च (गुरुवार) यानी कल महाशिवरात्रि मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से दो गायों के दान के बराबर फल मिलता है.

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत तिथि-10 मार्च 2021(बुधवार)

फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ- 10 मार्च (बुधवार) को दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से
त्रयोदशी समाप्त- 11 मार्च (गुरुवार) दोपहर को 02 बजकर 39 मिनट पर

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प्रदोष व्रत पूजा विधि



प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. इसे प्रदोष काल कहा जाता है. इस दौरान स्नान के बाद पूजा के लिए बैठें. भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन, पुष्प, अक्षत, धूप, दक्षिणा और नैवेद्य अर्पित करें. महिलाएं मां पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएं. इस दिन मां पार्वती को श्रृंगार का सामान अर्पित करना शुभ माना जाता है.

प्रदोष व्रत के नियम

-प्रदोष व्रत करने के लिए व्रती को त्रयोदशी के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए.

-नहाकर भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए.

-इस व्रत में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है.

-गुस्सा या विवाद से बचकर रहना चाहिए.

-प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

-इस दिन सूर्यास्त से एक घंटा पहले नहाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए.

-प्रदोष व्रत की पूजा में कुशा के आसन का प्रयोग करना चाहिए.

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प्रदोष व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

इस व्रत में पूरे दिन अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है. सुबह स्नान करने के बाद दूध पी सकते हैं. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के बाद फलाहार कर सकते हैं. प्रदोष व्रत में नमक खाने की मनाही होती है. सिर्फ फल का सेवन किया जा सकता है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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