Pradosh Vrat 2021: प्रदोष व्रत आज, इस कथा को पढ़ने से सारे कष्ट होंगे दूर

बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है.

Pradosh Vrat 2021: प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 6:49 AM IST
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Pradosh Vrat 2021: मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत आज है. वहीं 11 मार्च (गुरुवार) यानी कल महाशिवरात्रि मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. बुधवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से दो गायों के दान के बराबर फल मिलता है.

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत तिथि-10 मार्च 2021(बुधवार)

फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी प्रारम्भ- 10 मार्च (बुधवार) को दोपहर 02 बजकर 40 मिनट से
त्रयोदशी समाप्त- 11 मार्च (गुरुवार) दोपहर को 02 बजकर 39 मिनट पर

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बुध प्रदोष व्रत कथा



बुध प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार, एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ. विवाह के 2 दिनों बाद उसकी पत्‍नी मायके चली गई. कुछ दिनों के बाद वह पुरुष पत्‍नी को लेने उसके वहां गया. बुधवार को जब वह पत्‍नी के साथ लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का प्रयत्‍न किया कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं होता. लेकिन वह नहीं माना और पत्‍नी के साथ चल पड़ा. नगर के बाहर पहुंचने पर पत्‍नी को प्यास लगी. पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में चल पड़ा. पत्‍नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई. थोड़ी देर बाद पुरुष पानी लेकर वापस लौटा, तब उसने देखा कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी पी रही है. उसको क्रोध आ गया.

वह निकट पहुंचा तो उसके आश्‍चर्य का कोई ठिकाना न रहा, क्योंकि उस आदमी की सूरत उसी की भांति थी. पत्‍नी भी सोच में पड़ गई. दोनों पुरुष झगड़ने लगे. भीड़ इकट्ठी हो गई. सिपाही आ गए. हमशक्ल आदमियों को देख वे भी आश्‍चर्य में पड़ गए. उन्होंने स्त्री से पूछा- उसका पति कौन है?. वह कर्तव्यविमूढ़ हो गई. तब वह पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान! हमारी रक्षा करें. मुझसे बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार को पत्‍नी को विदा करा लिया. मैं भविष्य में ऐसा कदापि नहीं करूंगा. जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया. पति-पत्‍नी सकुशल अपने घर पहुंच गए. उस दिन के बाद से पति-पत्‍नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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