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शनि प्रदोष व्रत आज, इस विधि से करें पूजा बाधाएं होंगी दूर

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Updated: November 9, 2019, 9:21 AM IST
शनि प्रदोष व्रत आज, इस विधि से करें पूजा बाधाएं होंगी दूर
शनि प्रदोष व्रत आज

शनि प्रदोष व्रत: इस दिन जो भी जातक ये व्रत करता है उसे किसी ब्राह्मण को गोदान करने के समान पुण्य लाभ होता है साथ ही उसके जीवन से सभी अड़चने और बाधाएं दूर होती हैं...

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  • Last Updated: November 9, 2019, 9:21 AM IST
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प्रदोष व्रत: आज 9 नवंबर शनिवार को प्रदोष व्रत है. शनिवार के दिन पड़ने के कारण इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए लोग प्रदोष व्रत करते हैं. यह भी माना जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव व्रती भक्त की सभी प्रकार की परेशानियों का हरण कर लेते हैं. इस दिन भक्त माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं. इस दिन जो भी जातक ये व्रत करता है उसे किसी ब्राह्मण को गोदान करने के समान पुण्य लाभ होता है साथ ही उसके जीवन से सभी अड़चने और बाधाएं दूर होती हैं...

प्रदोष व्रत की पूजा-विधि:
प्रदोष व्रत करने वाले व्रती को इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए. इसके बाद नहा-धोकर पूरे विधि-विधान के साथ भगवान शिव का भजन कीर्तन और पूजा-पाठ करना चाहिए. इसके बाद पूजाघर में झाड़ू-पोछा कर पूजाघर समेत पूरे घर में गंगाजल से पवित्रीकरण करना चाहिए. इसके बाद पूजाघर को गाय के गोबर से लीपना चाहिए.

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प्रदोष व्रत को लेकर मान्यताएं:
हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलियुग में जब समाज में हर तरफ कुरीतियों का बोलबाला हो ऐसे समय में यह व्रत अत्यंत मंगल परिणाम देने वाला होता है. प्रदोष का अर्थ होता है शाम का समय. ऐसा माना जाता है कि शाम के समय प्रदोषकाल में भगवान शिव कैलाश पर्वत के चांदी से बने भवन में तांडव नृत्य करते हैं. इस समय सारे देवी-देवता उनकी आराधना करते हैं.

मिलता है यह फल:
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ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त ये व्रत करता है उसे किसी ब्राह्मण को गोदान (गाय का दान) करने के समान पुण्य लाभ होता है.

प्रदोष व्रत में इस मंत्र का करें जाप:
केले के पत्तों और रेशमी वस्त्रों की सहायता से एक मंडप तैयार करना चाहिए. अब चाहें तो आटे, हल्दी और रंगों की सहायता से पूजाघर में एक अल्पना (रंगोली) बना लें. इसके बाद साधक (व्रती) को कुश के आसन पर बैठ कर उत्तर-पूर्व की दिशा में मुंह करके भगवान शिव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. व्रती को पूजा के समय 'ॐ नमः शिवाय' और शिवलिंग पर दूध, जल और बेलपत्र अर्पित करना चाहिए.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 9, 2019, 4:55 AM IST
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