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प्रदोष व्रत आज, पूजा के बाद पढ़ें ये आरती, दूर होगी सारी बाधा, मिलेगा गोदान का पुण्य

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Updated: November 24, 2019, 10:01 AM IST
प्रदोष व्रत आज, पूजा के बाद पढ़ें ये आरती, दूर होगी सारी बाधा, मिलेगा गोदान का पुण्य
प्रदोष व्रत आज, पढ़ें पूजा विधि

प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat): प्रदोष व्रत शरीर में कोई रोग दोष नहीं होता और जातक को भगवान भोले शंकर की कृपा प्राप्त होती है. इस व्रत का पुण्य फल एक ब्राह्मण को सौ गायें दान करने के बराबर माना जाता है...

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  • Last Updated: November 24, 2019, 10:01 AM IST
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प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat): आज 24 नवंबर रविवार को प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है.माना जाता है कि त्रयोदशी तिथि का सांध्य काल ही प्रदोष काल होता है. प्रदोष व्रत का महत्व वार के हिसाब से अलग अलग होता है. मान्यता है कि रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत शरीर में कोई रोग दोष नहीं होता और जातक को भगवान भोले शंकर की कृपा प्राप्त होती है. इस व्रत का पुण्य फल एक ब्राह्मण को सौ गायें दान करने के बराबर माना जाता है. आइए जानते हैं कैसे करें प्रदोष व्रत की पूजा और इसके पढ़ें भगवान शिव की आरती...

ऐसे करें प्रदोष व्रत की पूजा:

1. अगर आपने प्रदोष व्रत करने का संकल्प लिया है तो इस दिन भोर में बिस्तर छोड़ने के बाद नित्यकर्म और स्नान से निवृत होकर भगवान शिव के मंदिर जाना चाहिए. इसके बाद पूजा पाठ और भजन कीर्तन करना चाहिए.
2. घर आकर पूजाघर की साफ सफाई करने के बाद गंगाजल से पवित्रीकरण करना चाहिए. इसके बाद भगवान शिव को भांग, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने के बाद दिया बाती करनी चाहिए. बता दें कि धतूरा, बेलपत्र और भांग भगवान शिव को बेहद प्रिय माने गए हैं.

3. इसके बाद दिया बाती से भगवान शिव की आरती गानी चाहिए.
भगवान शिव की आरती:
शिव आरती इस प्रकार हैॐ जय शिव ओंकारा....
एकानन चतुरानन पंचांनन राजे|
हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥

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ॐ जय शिव ओंकारा...
दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें|
तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥

ॐ जय शिव ओंकारा...
अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी|
चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा....
श्वेताम्बर,पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें|
सनकादिक, ब्रम्हादिक, भूतादिक संगें||

ॐ जय शिव ओंकारा...
कर के मध्य कमड़ंल चक्र, त्रिशूल धरता|
जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता॥

ॐ जय शिव ओंकारा...
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका|
प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका॥

ॐ जय शिव ओंकारा...
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रम्हचारी|
नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा...
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें|
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें॥

ॐ जय शिव ओंकारा...
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा.

आरती के बाद आप भगवान शिव के इन दो मंत्रो का पाठ भी कर सकते हैं:
1.कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं| सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि॥
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥

2.ॐ नमः शिवाय

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 24, 2019, 9:57 AM IST
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