इस आध्यात्मिक गुरु को कोरोना काल में क्यों तोड़ना पड़ा अपना 'व्रत'

इस आध्यात्मिक गुरु को कोरोना काल में क्यों तोड़ना पड़ा अपना 'व्रत'
आध्यात्मिक संगठन राधास्वामी सत्संग ब्यास फोटो साभार: Radha Soami Satsang Beas youtube चैनल से

राधास्वामी मत (Radha Soami Satsang Beas) आध्यात्मिक संगठन है जिसके तहत एक आध्यात्मिक गुरु की गाइडेंस में लोगों को लगभग सभी धर्मों और संप्रदायों में बताई और कही गई शिक्षाओं के हवाले से आत्मिक प्रगति के लिए प्रेरित किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 22, 2020, 11:11 AM IST
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पिछले छह महीनों में दुनिया ने कोरोना वायरस (Covid 19)के संक्रमण के चलते तमाम उथल-पुथल देख ली है. न सिर्फ लोगों की दिनचर्या बदली है बल्कि बेहद जरूरी और कभी न रुकने वाले विश्व भर के कई काम भी ठप पड़े हैं. ऐसे में लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते ईश्वर की भक्ति में लगे लोगों, संस्थाओं और संगठनों के रहन-सहन में भी बदलाव आया है. इस बीच आध्यात्मिक संगठन राधास्वामी सत्संग ब्यास (RSSB) के क्रियाकलापों में भी एक बदलाव देखा गया जो पिछले कई दशकों में नहीं देखा गया था. आरएसएसबी  (Radha Soami Satsang Beas) के स्प्रिचुअल टीचर यानी आध्यात्मिक गुरु गुरुन्दिर सिंह ने अपना वह व्रत तोड़ दिया जिसे उन्होंने डेरा ब्यास के गुरु की गद्दी पर बैठने पर लिया था. मीडिया से दूरी बनाए रखने का यह व्रत करीब 30 साल पहले लिया गया था.

पिछले कुछ हफ्तों के भीतर राधास्वामी सत्संग ब्यास  (Radha Soami Satsang Beas) का ऑफिशल यूट्यूब चैनल भी शुरू किया गया जबकि अब तक हमेशा ही सत्संग संबंधी किसी भी प्रचार प्रसार या विज्ञापनबाजी को हतोत्साहित किया जाता था. ऐसा करने की वजह यह बताई जाती थी कि राधास्वामी सत्संग ब्यास का उद्देश्य आध्यात्मिक जीवन जीना और संतों के बताए रास्ते पर चलना है, न कि प्रचार प्रसार के जरिए संगठन में लोगों को जोड़ना या किसी तरह की मान-बढ़ाई चाहना. आखिर क्या वजह रही कि कोरोना काल में समाज सेवा में साइलेंट रूप से लगे रहे राधास्वामी सत्संग ब्यास संगठन के आध्यात्मिक गुरु को मीडिया के जरिए लोगों से मुखातिब होना पड़ा.

पिछले दिनों नॉन-कर्मशल, ऐड फ्री यूट्यूब चैनल के जरिए लोगों से मुखातिब हुए गुरिन्दर सिंह ने इकारण साफ किया. उनसे पूछा गया कि कई लोग इस बात से हैरान हैं कि आखिर ऐसा निर्णय अब इतने सालों बाद क्यों लिया गया. उन्होंने हंसते हुए कहा, 'जब मैं 90 के दशक में यहां आया, मैंने कहा था कि मैं कभी मीडिया का इस्तेमाल नहीं करुंगा... यहां सत्संग होगा, नियमित रूप से होगा, आमने सामने बैठकर होगा लेकिन मीडिया के जरिए कभी नहीं होगा.... लेकिन मेरे ख्याल से हमें.. कभी भी.. 'कभी नहीं' शब्द कभी नहीं कहना चाहिए.' उन्होंने संगठन से जुड़े लोगों के प्यार और भक्ति के संदर्भ में कहा, 'यह ऐसा वक्त है जब लोगों को सपोर्ट की जरूरत है. इसलिए उन तक पहुंचना जरूरी था. इसलिए मजबूरी में मीडिया का सहारा लेना पड़ा.'



जब उनसे पूछा गया, तो यह इसलिए क्योंकि सगंत आपके लिए तड़प रही थी इसलिए आपने यह निर्णय लिया... तो उन्होंने कहा, मेरे ख्याल में जहां प्यार का रिश्ता होता है... जब आप पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं...या आप कहीं और नौकरी कर रहे होते हैं..तब क्या आप अपने पिता की आवाज नहीं सुनना चाहेंगे.. तब आप क्या यह नहीं जानना चाहेंगे कि उनकी जिन्दगी में क्या चल रहा है... इससे आपको सहारा मिलता है और आपमें कुछ हौसला आ जाता है... शायद यही व कारण है कि मीडिया के जरिए उन तक पहुंचना पड़ा.



वहीं जब उनसे पूछा गया कि परमार्थ के मार्ग पर चलते हुए सबसे बड़ी रुकावट क्या आती है... तब उन्होंने कहा, सबसे बड़ी रुकावट आप खुद होते हो. रुहानियत के मार्ग पर चलते हुए भी बहुत से लोगों में हौमें (ईगो) आ जाती है. ​

यह किस प्रकार का आध्यात्मिक मत है?
राधास्वामी मत आध्यात्मिक संगठन है जिसके तहत एक आध्यात्मिक गुरु की गाइडेंस में लोगों को लगभग सभी धर्मों और संप्रदायों में बताई और कही गई शिक्षाओं के हवाले से आत्मिक प्रगति के लिए प्रेरित किया जाता है. इनकी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, राधा स्वामी का मतलब है, लॉर्ड ऑफ सोल. पंजाब के अमृतसर के करीब ब्यास नामक गांव में इनका मुख्य संत्सग स्थल और हेड क्वार्टर है. हालांकि राधास्वामी नाम से कई और संगठन भी चल रहे हैं लेकिन आरएसएसबी का दावा है कि उनका उनसे कोई एसोसिएशन नहीं है. साथ ही इस संगठन का किसी राजनीतिक पार्टी से भी कोई लेना देना नहीं है.
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