Raksha Bandhan 2019: केवल राखी के दिन ही खुलते हैं भगवान विष्णु के इस मंदिर के कपाट, जानें क्यों?

Raksha Bandhan 2019: आज 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन ही रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया जा रहा है. इसलिए आज सुबह से ही मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं. ..

News18Hindi
Updated: August 15, 2019, 10:18 AM IST
Raksha Bandhan 2019: केवल राखी के दिन ही खुलते हैं भगवान विष्णु के इस मंदिर के कपाट, जानें क्यों?
केवल रक्षाबंधन पर खुलता है यह मंदिर!
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Updated: August 15, 2019, 10:18 AM IST
Raksha Bandhan 2019: आज बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन मनाया. बहनों ने जहां भाइयों के स्वस्थ जीवन और लंबी आयु की कामना की वहीं भाइयों ने उन्हें प्रेमपूर्ण उपहार दिए और साथ ही उनकी रक्षा का वचन भी दिया. राखी का यह त्योहार भाई बहन के स्नेह का प्रतीक है. हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ लोग भगवान को भी राखी बांधते हैं ताकि भगवान हर संकट से उनकी रक्षा करें और जीवन के हर कठिन मोड़ पर उन्हें रास्ता दिखाएं और सकारात्मकता की तरफ प्रेरित करें. इस दिन मंदिरों में लोग भगवान को राखी बांधते है और विशेष पूजा करते हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि एक ऐसा भी मंदिर है जिसके द्वार सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही खुलते हैं. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में...

यह मंदिर है बद्रीनाथ इलाके की उर्गम घाटी में. इस मंदिर का नाम है श्री वंशी नारायण मंदिर जो साल में केवल एक बार रक्षाबंधन के दिन ही खुलता है बाकी के 364 दिन मंदिर के कपाट बंद रहते हैं. रक्षाबंधन पर प्रातः ही मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं. शाम में सूर्यास्त से पहले विधिवत मंदिर में पूजा-पाठ होता है और इसके बाद कपाट बंद कर दिए जाते हैं.

आज 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन ही रक्षाबंधन का त्यौहार भी मनाया जा रहा है. इसलिए आज सुबह से ही मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं. इस मंदिर में केवल रक्षाबंधन के दिन ही पूजा अर्चना भी की जाती है. इस मंदिर में भगवान वंशीनारायण की पूजा होती है. इस दिन लड़कियां भगवान को राखी बांधती हैं.

वेबसाइट नवभारत टाइम्स में पौराणिक मान्यताओं के हवाले से प्रकाशित किया गया है कि मंदिर में एक ही दिन पूजा इसलिए होती है क्योंकि बाकी के 364 दिन देवर्षि नारद अपने इष्ट भगवान इष्ट की पूजा अर्चना में लीन रहते हैं. इसलिए मनुष्य यहां केवल रक्षाबंधन के मौके पर ही पूजा पाठ कर सकते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: August 15, 2019, 10:16 AM IST
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