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Raksha Bandhan 2021: रक्षाबंधन पर भाई को सुनाएं यह कथा, दूर हो जाएंगी सारी दिक्कतें

Raksha Bandhan 2021: रक्षाबंधन पर भाई को सुनाएं यह कथा, दूर हो जाएंगी सारी दिक्कतें

रक्षा बंधन पर ये कथा सुनने से बाधाएं दूर होती हैं -(Image-Shutterstock)

रक्षा बंधन पर ये कथा सुनने से बाधाएं दूर होती हैं -(Image-Shutterstock)

Raksha Bandhan: रक्षा बंधन पर बहनें अपने भाइयों को यह पारंपरिक कथा (Traditional Story) सुनायें तो भाइयों के लिए सफलता के सभी द्वार खुल जाते हैं. साथ ही भाई-बहनों की सभी दिक्कतें दूर हो जाती हैं.

    Raksha Bandhan Katha: रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्यौहार 22 अगस्त यानी रविवार को है, बहनें हों या भाई सभी इस त्यौहार (Festival) को धूमधाम से मनाने के लिए तैयारियों (Preparations) में लगे हुए हैं. इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधकर जहां उनको आशीर्वाद देकर उनकी सफलता और बेहतर जिंदगी के लिए दुआएं मांगती हैं, वहीं भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देकर तरह-तरह के उपहार भेंट करते हैं लेकिन इन सबके साथ अगर बहनें अपने भाइयों को यह पारंपरिक कथा भी सुनाएं तो भाइयों के सफलता के सभी द्वार खुल जाते हैं और भाई-बहनों की सभी दिक्कतें दूर हो जाती हैं. कहते हैं रक्षा बंधन की ये कथा भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी. दरअसल, महाभारत काल में रक्षा सूत्र का वर्णन आता है. जिसके अनुसार शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण की छोटी उंगली में चोट लग गयी थी. तब द्रौपदी ने अपने आंचल का टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली में बांध दिया था. उस समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को रक्षा का वचन दिया था जिसके बाद चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा की थी.

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    रक्षा बंधन की कथा

    एक बार राक्षसों और देवताओं में भयंकर युद्ध छिड़ गया था, जो करीब 12 वर्षों तक चलता रहा. फिर एक समय ऐसा भी आया जब असुरों ने देवताओं को पराजित कर दिया. इसके बाद देवराज इंद्र अपने देवगणों को लेकर अमरावती स्थान पर चले गए. इंद्र के जाते ही दैत्यराज ने तीनों लोकों पर अपना राज स्थापित कर लिया और यह मुनादी करवा दी कि कोई भी देवता उसके राज्य में प्रवेश न करे और कोई भी व्यक्ति धर्म-कर्म के कार्यों में हिस्सा न ले और कहा गया कि अब से सिर्फ असुरों की ही पूजा की जाएगी. असुरराज की इस आज्ञा के बाद धार्मिक कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग गई. धर्म की हानि होने से देवताओं की शक्ति क्षीण होने लगी. तब देवराज इंद्र ने देवगुरु बृहस्पति की शरण ली और इस समस्या का समाधान करने की प्रार्थना की. तब देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र को रक्षा सूत्र का विधान करने के लिए कहा. उनके बताए विधान को पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शुभ मुहूर्त में ही किया जाना शुभ माना जाता है और रक्षा सूत्र बांधते समय एक मंत्र का पाठ करने के लिए भी कहा जाता है.

    इस मंत्र का करें पाठ

    येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:।

    तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

    (धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि जिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, हे रक्षासूत्र तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना.)

    देवगुरु बृहस्पति के कहे अनुसार इंद्राणी ने श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शुभ मुहूर्त में इंद्र की दाहिनी कलाई पर विधि विधान से रक्षा सूत्र बांधा और असुरों से लड़ने के लिए युद्धभूमि में भेज दिया. रक्षा सूत्र यानि रक्षा बंधन के प्रभाव से राक्षस पराजित हुए और देवराज इंद्र को खोया हुआ राज्य और सम्मान फिर से वापस मिल गया. मान्यता है कि इस दिन से रक्षाबंधन की परंपरा का आरंभ हुआ.

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    कथा का महत्व

    ऐसी मान्यता है कि रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने से पहले, बहनों को इस कथा का पाठ करना चाहिए और इस कथा को अपने भाई को सुनाना चाहिए. इस कथा को सुनने सुनाने से जीवन में सफलता मिलती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    Tags: Raksha bandhan, Raksha Bandhan 2021, Religion, Religious

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