Ram Navami 2021: ये हैं प्रभु श्रीराम के 5 प्रसिद्ध मंदिर, जानें इनके बारे में ये खास बात

भक्त श्रीराम की पूजा के लिए व्रत रखते हैं. इस दिन हवन और कन्या पूजन का भी विधान है.

भक्त श्रीराम की पूजा के लिए व्रत रखते हैं. इस दिन हवन और कन्या पूजन का भी विधान है.

Ram Navamai 2021: श्रीराम चन्द्र का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में हुआ था. इस दिन भगवान राम की उपासना के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं.

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  • Last Updated: April 16, 2021, 9:00 AM IST
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Ram Navami 2021: हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी मनाई जाएगी. इस साल राम नवमी 21 अप्रैल, 2021 (बुधवार) को पड़ रही है. इसी दिन मर्यादा-पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम (Lord Rama) ने राजा दशरथ के घर पर जन्म लिया था. श्रीराम चन्द्र का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र तथा कर्क लग्न में हुआ था. इस दिन भगवान राम की उपासना के लिए विशेष तैयारियां की जाती हैं. भक्त श्रीराम की पूजा के लिए व्रत रखते हैं. इस दिन हवन और कन्या पूजन का भी विधान है. रामनवमी के अवसर पर भक्त देश के कुछ प्रसिद्ध राम मंदिरों के दर्शन जरूर करते हैं. आइए आपको बताते हैं कौन से हैं वो राम मंदिर और जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें. हालांकि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस बार राम नवमी घर पर ही मनाने की कोशिश करें और घर पर ही प्रभु श्रीराम की पूजा करें.

रघुनाथ मंदिर, जम्मू

जम्मू और कश्मीर के जम्मू शहर में स्थित यह राम मंदिर आकर्षक वास्तुकला का बड़ा और सुंदर नमूना है. इस मंदिर को 1835 में महाराजा गुलाब सिंह ने बनवाना शुरू किया था और इसका पूर्ण निर्माण महाराजा रणजीतसिंह के काल में हुआ था. इस मंदिर में 7 ऐतिहासिक धार्मिक स्‍थल मौजूद हैं. मंदिर के भीतर की दीवारों पर तीन तरफ से सोने की परत चढ़ी हुई है. इसके अलावा मंदिर के चारों ओर कई मंदिर स्थित है जिनका सम्बन्ध रामायण काल के देवी-देवताओं से हैं.

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त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर, केरल

यह मंदिर केरल के दक्षिण-पश्चिमी शहर त्रिप्प्रयार (त्रिप्रायर) में स्थित है. त्रिप्रायर नदी के किनारे स्थित त्रिप्रायर श्रीराम मंदिर कोडुन्गल्लुर का प्रमुख धार्मिक स्थान है. यह त्रिप्रायर में स्थित है, जो कोडुन्गल्लुर शहर से लगभग 15 किलोमीटर और त्रिशूर से 25 किलोमीटर दूर है. भगवान विष्णु के 7वें अवतार भगवान श्रीराम की इस मंदिर में पूजा की जाती है.

चित्रकूट राम मंदिर, प्रयागराज



श्रीराम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सहित प्रयाग पहुंचे थे. यहां गंगा-जमुना का संगम स्थल है. प्रभु श्रीराम ने संगम के निकट यमुना नदी को पार किया और फिर चित्रकूट पहुंचे थे. यहां पर वाल्मीकि आश्रम, मांडव्य आश्रम, भरतकूप भी स्थित हैं.

हरिहरनाथ मंदिर, सोनपुर

भगवान विष्णु को समर्पित हरिहरनाथ मंदिर का निर्माण भगवान राम ने त्रेतायुग में करवाया था. माना जाता है कि श्रीराम ने यह मंदिर तब बनवाया था, जब वह माता सीता के स्वयंवर में जा रहे थे. सारण और वैशाली जिले की सीमा पर गंगा और गंडक नदी के संगम पर स्थित इस मंदिर का निर्माण बाद में राजा मानसिंह ने करवाया. वर्तमान में जो मंदिर है, उसका जीर्णोद्धार तत्कालीन राजा राम नारायण ने करवाया था.

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श्रीतिरुनारायण स्वामी मंदिर, कर्नाटक

मेलकोट या मेलुकोट कर्नाटक के मांड्या जिला तहसील पांडवपुरा का एक छोटा-सा कस्बा है, जो कावेरी नदी के तट पर बसा है. इस स्थान को तिरुनारायणपुरम भी कहते हैं. यह एक छोटी-सी पहाड़ी है जिसे यदुगिरि कहते हैं. यदुगिरि पहाड़ी पर दो मंदिर स्थित है. एक मंदिर भगवान नृसिंह का है जो पहाड़ी के रास्ते में पहले पड़ता है और दूसरा चेलुवा नारायण का मंदिर जो पहाड़ी के सबसे ऊपर स्थित है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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