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Ramadan 2021: माहे-रमज़ान का 'अलविदा जुमा' है बहुत ख़ास, जानिए क्‍यों है इसकी अहमियत

Ramadan 2021: अलविदा की नमाज हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है.

Ramadan 2021: आखिरी जुमा को 'अलविदा जुमा' (Alvida Jumma) कहते हैं. इस्‍लाम में अलविदा का खास महत्व और दर्जा है. इस दिन को दुनिया भर के मुसलमान पूरी अजमत अकीदत से और अल्‍लाह (Allah) की इबादत (Worship) करके गुजारते हैं.

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    Ramadan 2021: आज 'अलविदा' यानी रमजान (Ramzan/Ramadan) का आखिरी जुमा है. रमज़ान में पड़ने वाले इस आखिरी जुमा को 'अलविदा जुमा' (Alvida Jumma) कहते हैं. अलविदा का खास महत्व और दर्जा है. इस दिन को दुनिया भर के मुसलमान पूरी अजमत अकीदत से और अल्‍लाह (Allah) की इबादत (Worship) करके गुजारते हैं. यह जुमा अन्‍य जुमा के मुकाबले इसलिए खास है क्‍योंकि यह रमजान के महीने का आखिरी जुमा यानी शुक्रवार है और इस साल के बाद रमजान में कोई और जुमा नहीं पड़ेगा. वहीं अलविदा का मतलब रमजान के पाक महीने का समाप्‍त होना यानी इसकी विदाई है. यही वजह है कि इसे अलविदा कहते हैं और इसकी नमाज भी काफी अहम मानी जाती है. इस्लाम में अलविदा को सबसे अफजल करार दिया गया है.

    रमज़ान का आखिरी जुमा कई मायनों में ख़ास है. एक तो इसके आने का मतलब यह है कि अब बस ईद आने ही वाली है. यानी ईद के चांद से पहले का यह आखिरी जुमा है. वहीं इबादत के लिहाज़ से भी यह दिन मुसलमानों के लिए बेहद ख़ास है. इस दिन मुसलमान अल्‍लाह की इबादत करते हैं और इस बात का शुक्र अदा करते हैं कि उन्‍हें माहे रमज़ान के पाक महीने में रोज़े रखने का मौका मिला. तरावीह पढ़ने और अल्‍लाह की इबादत करने का सम्‍मान हासिल हुआ.

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    एआरवाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक जुमातुल विदा यानी अलविदा की अहमियत को इस बात से ही समझा जा सकता है कि ख़ुद अल्लाह तआला ने पवित्र क़ुरआन मजीद में इस दिन की अहमियत को मुसलमानों के लिए खास फरमाया.

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    इस दिन को कहते हैं 'छोटी ईद'
    अलविदा की नमाज हर मुसलमान के लिए बेहद खास होती है. इस दिन कुछ मुसलमान नए कपड़े पहन कर अपने रब की इबादत करते हैं. अलविदा को छोटी ईद भी कहते हैं. माना जाता है कि अलविदा की नमाज के बाद अगर सच्चे दिल से मांगी जाए तो अल्‍लाह बंदे की हर जायज दुआ कुबूल फ़रमाते हैं और बंदों की तौबा को कुबूल करके उनके गुनाह माफ करते हैं.
    Published by:Naaz Khan
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