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रामेश्वरम मंदिरः करें ये एक काम तो आसानी से होंगे इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन

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Updated: December 8, 2019, 5:56 PM IST
रामेश्वरम मंदिरः करें ये एक काम तो आसानी से होंगे इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन
रामेश्वरम् का मंदिर भारतीय निर्माण-कला और शिल्पकला का एक सुंदर नमूना है. इसके प्रवेश-द्वार चालीस फीट ऊंचा है.

रामेश्वरम मंदिर में लोगों को दर्शन करने में कई घंटों का समय लग जाता है क्योंकि ज्योतिर्लिंग धाम होने के कारण इस मंदिर में कई लाख लोग रोज दर्शन करने आते हैं.

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  • Last Updated: December 8, 2019, 5:56 PM IST
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रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ है. यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है. यह तीर्थ हिंदुओं के चार धामों में से एक है. इसके अलावा यहां स्थापित शिवलिंग बारह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. रामेश्वरम चेन्नई से लगभग 425 मील दक्षिण-पूर्व में है. यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है. यहां के मंदिर के तीसरे प्रकार का गलियारा विश्व का सबसे लंबा गलियारा है. रामेश्वरम् का मंदिर भारतीय निर्माण-कला और शिल्पकला का एक सुंदर नमूना है.

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रामेश्वरम मंदिर की रोचक कहानी
इसके प्रवेश-द्वार चालीस फीट ऊंचा है. रामेश्वरम के विख्यात मंदिर की स्थापना के बारे में एक रोचक कहानी कही जाती है. सीताजी को रावण के पास से छुड़ाने के लिए राम ने लंका पर चढ़ाई की थी. उन्होंने लड़ाई के बिना सीताजी को छुड़वाने का बहुत प्रयत्न किया, पर जब राम को सफलता न मिली तो विवश होकर उन्होंने युद्ध किया. इस युद्ध में रावण और उसके सब साथी राक्षस मारे गए. सीताजी को मुक्त कराकर श्रीराम वापस लौटे. इस युद्ध को करने के लिए राम को वानर सेना सहित सागर को पार करना था, जो अत्यधिक कठिन कार्य था.

रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना 
रावण भी साधारण राक्षस नहीं था. वह पुलस्त्य महर्षि का नाती था. चारों वेदों का जाननेवाला था और भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. इस कारण श्रीराम को उसे मारने के बाद बहुत दुख हुआ. ब्रह्म-हत्या का पाप उन्हें लग गया. इस पाप को धोने के लिए उन्होंने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना करने का निश्चय किया. यह निश्चय करने के बाद श्रीराम ने हनुमान को आज्ञा दी कि काशी जाकर वहां से एक शिवलिंग ले आए. हनुमान श्रीराम का आदेश मान उड़ चले. शिवलिंग की स्थापना की नियत घड़ी पास आ गई लेकिन हनुमान का कहीं पता न था.

शिवलिंग रामनाथ कहलाता हैजब सीताजी ने देखा कि हनुमान के लौटने मे देरी हो रही है, तो उन्होंने समुद्र के किनारे के रेत को मुट्ठी में बांधकर एक शिवलिंग बना दिया. यह देखकर राम बहुत प्रसन्न हुए और नियम समय पर इसी शिवलिंग की स्थापना कर दी गई. छोटे आकार का यही शिवलिंग रामनाथ कहलाता है. बाद में हनुमान के आने पर पहले से प्रतिष्ठित छोटे शिवलिंग के पास ही राम ने काले पत्थर के उस बड़े शिवलिंग को स्थापित कर दिया. ये दोनों शिवलिंग इस तीर्थ के मुख्य मंदिर में आज भी पूजित हैं. यही मुख्य शिवलिंग ज्योतिर्लिंग है.

ज्योतिर्लिंग के दर्शन
आमतौर पर ये माना जाता है कि रामेश्वरम मंदिर में लोगों को दर्शन करने में कई घंटों का समय लग जाता है क्योंकि धाम होने के कारण इस मंदिर में कई लाख लोग रोज दर्शन करने आते हैं. आइए हम आपको बताते हैं उन आसान तरीकों के बारे में जिससे आप इस मंदिर में बड़ी ही आसानी से ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं और इसमें आपको ज्यादा समय भी नहीं गंवाना पड़ेगा.

1. ऑनलाइन बुकिंग (Online booking)
आप रामेश्वरम मंदिर के ऑफिशियल वेबसाइट http://www.rameswaramtemple.tnhrce.in/ पर जाकर स्पेशल दर्शन या सेवा के लिए पहले से ही अपनी बुकिंग करा सकते हैं, जिससे आपकी यात्रा आसान हो जाएगी. यहां आप मंदिर के गेस्ट हाउस में ठहरने की बुकिंग भी करा सकते हैं.

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2. सिफारिशी पत्र (VIP recommendation letter)
जिन यात्रियों को ऑनलाइन बुकिंग नहीं मिलती है वो अपने जनप्रतिनिधि जिसमें सांसद, मंत्री और विधायक शामिल हैं, के सिफारिशी पत्र पर भी प्राथमकिता के आधार पर दर्शन की पर्ची पा सकते हैं. इसके लिए उन्हें अपना पत्र को अध्यक्ष रामेश्वरम मंदिर के नाम से दर्शन के एक दिन पहले तक जमा कराना होगा. उपलब्धता के आधार पर आपको टिकट आंवटित कर दिया जाता है. किस सेवा का कितना रेट है ये डिटेल आप बेबसाइट पर आसानी से जान सकते हैं.

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First published: December 8, 2019, 4:40 PM IST
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