Randhan Chhath 2020: हलछठ व्रत आज, जानें कथा और संपूर्ण पूजा विधि

Randhan Chhath 2020: हलछठ व्रत आज, जानें कथा और संपूर्ण पूजा विधि
मान्‍यता है कि इस दिन भगवान बलराम (Lord Balram) की पूजा करने से संतान की रक्षा होती है.

राधन छठ (Randhan Chhath 2020) : इसे हलषष्ठी, हरछठ व्रत, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, कमर छठ, या खमर छठ भी कहा जाता है. माताओं ने आज अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत रखा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 6:54 AM IST
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राधन छठ (Randhan Chhath 2020) : आज राधन छठ है. इसे ललही छठ और हलछठ व्रत भी कहा जाता है. इसके अलावा इसे हलषष्ठी, हरछठ व्रत, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, कमर छठ, या खमर छठ भी कहा जाता है. माताओं ने आज अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत रखा है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माताएं इन दिन संतान की सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना के साथ हलछठ व्रत करती हैं. इसी दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म भी हुआ था.
हलछठ व्रत पूजा विधि:
हलछठ व्रत के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े धारण करें. पूजा घर की साफ सफाई करें और भगवान की पूजा करें. दिन भर बिना कुछ खाए पिए व्रत रहें . शाम को पूजा और कथा पढ़ने के बाद खाने में फल लें.

हलछठ व्रत कथा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में एक ग्वालिन थी. उसका प्रसवकाल अत्यंत निकट था. एक ओर वह प्रसव से व्याकुल थी तो दूसरी ओर उसका मन गौ-रस (दूध-दही) बेचने में लगा हुआ था. उसने सोचा कि यदि प्रसव हो गया तो गौ-रस यूं ही पड़ा रह जाएगा.



यह सोचकर उसने दूध-दही के घड़े सिर पर रखे और बेचने के लिए चल दी किन्तु कुछ दूर पहुंचने पर उसे असहनीय प्रसव पीड़ा हुई. वह एक झरबेरी की ओट में चली गई और वहां एक बच्चे को जन्म दिया.

वह बच्चे को वहीं छोड़कर पास के गांवों में दूध-दही बेचने चली गई. संयोग से उस दिन हल षष्ठी थी. गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने सीधे-सादे गांव वालों में बेच दिया.

उधर जिस झरबेरी के नीचे उसने बच्चे को छोड़ा था, उसके समीप ही खेत में एक किसान हल जोत रहा था. अचानक उसके बैल भड़क उठे और हल का फल शरीर में घुसने से वह बालक मर गया.

इस घटना से किसान बहुत दुखी हुआ, फिर भी उसने हिम्मत और धैर्य से काम लिया. उसने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांके लगाए और उसे वहीं छोड़कर चला गया.

कुछ देर बाद ग्वालिन दूध बेचकर वहां आ पहुंची. बच्चे की ऐसी दशा देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि यह सब उसके पाप की सजा है.

वह सोचने लगी कि यदि मैंने झूठ बोलकर गाय का दूध न बेचा होता और गांव की स्त्रियों का धर्म भ्रष्ट न किया होता तो मेरे बच्चे की यह दशा न होती. अतः मुझे लौटकर सब बातें गांव वालों को बताकर प्रायश्चित करना चाहिए.

ऐसा निश्चय कर वह उस गांव में पहुंची, जहां उसने दूध-दही बेचा था. वह गली-गली घूमकर अपनी करतूत और उसके फलस्वरूप मिले दंड का बखान करने लगी. तब स्त्रियों ने स्वधर्म रक्षार्थ और उस पर रहम खाकर उसे क्षमा कर दिया और आशीर्वाद दिया.

बहुत-सी स्त्रियों द्वारा आशीर्वाद लेकर जब वह पुनः झरबेरी के नीचे पहुंची तो यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि वहां उसका पुत्र जीवित अवस्था में पड़ा है. तभी उसने स्वार्थ के लिए झूठ बोलने को ब्रह्म हत्या के समान समझा और कभी झूठ न बोलने का प्रण कर लिया. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
राधन छठ के बारे में जानें (फोटो साभार: instagram/divine_love_to_krishna)
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