Rath Saptami 2021: रथ सप्तमी पर सूर्यदेव की पूजा से दूर होते हैं सात जन्मों के पाप, ऐसे करें पूजा

सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि नष्ट हो जाते हैं व नेत्रज्योति बढ़ती है.

Rath Saptami 2021: पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव (Surya Dev) की उपासना तथा व्रत करते है, उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं. आज भी सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है.

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    Rath Saptami 2021: माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी का त्योहार मनाया जाता है. इस साल रथ सप्तमी 19 फरवरी (शुक्रवार) को है. श्रृग्वेद के ऋृषि कहते हैं कि जीवन तो सूर्यदेव (Suryadev) का दर्शन ही है. सात जन्मों के पापों को दूर करने के लिए रथ पर बैठे सूर्यदेव की पूजा की जाती है. इस दिन को अचला सप्तमी और भानु सप्तमी भी कहा जाता है. इस दिन को कश्यप ऋषि और अदिति के संयोग से भगवान सूर्य का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को सूर्य की जन्मतिथि भी कहा जाता है. इसी दिन से सूर्य के सातों घोड़े उनके रथ को वहन करना प्रारंभ करते हैं, इसलिए इसे रथ सप्तमी कहते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन तेल और नमक नहीं खाना चाहिए. इस दिन अपने गुरु को वस्त्र, तिल, गाय, दक्षिणा आदि देनी चाहिए. कहते हैं कि जो व्यक्ति इस दिन मीठा भोजन करता है उसे पूरे साल की सप्तमी व्रत का फल मिलता है. भविष्य पुराण में कहा गया है कि यह व्रत सौभाग्य, सुदंरता और उत्तम संतान प्रदान करता है.

    धर्मराज युधिष्टर ने जब इस विषय में श्रीकृष्ण से पूछा तो उन्होंने बताया कि एक गणिका इंदुमती ने अपने जीवन के अंत समय में वशिष्ठ मुनि से मृत्यु उपरांत उत्तम गति पाने का उपाय पूछा. मुनि ने कहा कि माघ मास की सप्तमी का व्रत करो. विधि इस प्रकार बताई. षष्ठी को एक बार भोजन करो. सप्तमी की सुबह स्नान से पहले आक के पत्ते सिर पर रखें और सूर्य का ध्यान करके गन्ने से जल सप्रर्श कर' नमस्ते रुद्रपाय रसाना पतये नमछ वरुणाय नमस्ते अस्तु' पढ़कर दीप प्रवाहित करें. स्नान के बाद सूर्य की अष्टदली प्रतिमा बना लें. उसमें शिव और पार्वती को स्थपित कर पूजन करें. फिर तांबे के पात्र में चावल भर दान करें. नदी में स्नान नहीं कर सकते तो गंगाजन मिलाकर दान करें. सूर्य को दीपदान करें.

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    रथ सप्तमी शुभ मुहूर्त
    सप्तमी तिथि आरंभ- 18 फरवरी 2021 (गुरुवार) को सुबह 8 बजकर 17 मिनट से
    सप्तमी तिथि समाप्त- 19 फरवरी 2021 (शुक्रवार) सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक
    सप्तमी के दिन अरुणोदय- सुबह 6 बजकर 32 मिनट
    सप्तमी के दिन अवलोकनीय (दिखने योग्य) सूर्योदय- सुबह 6 बजकर 56 मिनट.

    आरोग्य के लिए करें सूर्य उपासना
    सूर्य की रोगशमन शक्ति का उल्लेख वेद ,पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है. इनमें यह भी लिखा है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है. सूर्य की रोशनी के बिना जगत में कुछ भी संभव नहीं है. पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते है, उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं. आज भी सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है. शारीरिक कमजोरी, हड्डियों की कमज़ोरी या जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों में भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलने की संभावना बनती है.

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    सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि नष्ट हो जाते हैं व नेत्रज्योति बढ़ती है. ऐसा धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है. यदि निराशा से ग्रसित व्यक्ति यह पाठ करे तो उसका मनोवल पुष्ट होता है. वही सफ़ेद दाग सहित सभी प्रकार के कुष्ठ रोगों के उपचार में सूर्योपासना सहायक सिद्ध हुई है. वैदिक काल से ही हमारे ऋषि-मुनि इस बात से भली-भांति परिचित थे कि सूर्य ही जीवनप्रदायक और जीवनपोषक शक्ति है.(Disclaimer:इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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