Shani Pradosh Vrat Katha: शनि प्रदोष व्रत आज, पढ़ें पौराणिक कथा

प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में अधिक फलदायी होती है.

प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में अधिक फलदायी होती है.

Shani Pradosh Vrat Katha: भक्त आज भोलेशंकर और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं. प्रदोष व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु और संतान प्राप्ति की कामना के साथ रखा जाता है.

  • Last Updated: April 24, 2021, 6:24 AM IST
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Shani Pradosh Vrat Katha: आज शनि प्रदोष व्रत है. शनिवार के दिन पड़ने के कारन इन व्रत को शनि प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और शनिदेव को समर्पित माना जाता है. भक्त आज भोलेशंकर और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं. प्रदोष व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु और संतान प्राप्ति की कामना के साथ रखा जाता है. प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में अधिक फलदायी होती है. आइए आज हम आपके लिए लेकर आए हैं शनि प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा...

शनि प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा:

शनि प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीनकाल में एक नगर सेठ थे. सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान नहीं होने के कारण सेठ और सेठानी हमेशा दुःखी रहते थे.

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काफी सोच-विचार करके सेठजी ने अपना काम नौकरों को सौंप दिया और खुद सेठानी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े. अपने नगर से बाहर निकलने पर उन्हें एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे थे. सेठजी ने सोचा, क्यों न साधु से आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा की जाए.

सेठ और सेठानी साधु के निकट बैठ गए. साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि सेठ और सेठानी काफी समय से आशीर्वाद की प्रतीक्षा में बैठे हैं. साधु ने सेठ और सेठानी से कहा कि मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं. तुम शनि प्रदोष व्रत करो, इससे तुम्हें संतान सुख प्राप्त होगा.

साधु ने सेठ-सेठानी प्रदोष व्रत की विधि भी बताई और भगवान शंकर की यह वंदना बताई.



भगवान शंकर की वंदना -

हे रुद्रदेव शिव नमस्कार.

शिवशंकर जगगुरु नमस्कार..

हे नीलकंठ सुर नमस्कार.

शशि मौलि चन्द्र सुख नमस्कार..

हे उमाकांत सुधि नमस्कार.

उग्रत्व रूप मन नमस्कार..

ईशान ईश प्रभु नमस्कार.

विश्‍वेश्वर प्रभु शिव नमस्कार..

दोनों साधु से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा के लिए आगे चल पड़े. तीर्थयात्रा से लौटने के बाद सेठ और सेठानी ने मिलकर शनि प्रदोष व्रत किया जिसके प्रभाव से उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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