Rishi Panchami Vrat Katha: यहां पढ़ें ऋषि पंचमी व्रत की कथा

News18Hindi
Updated: September 3, 2019, 3:21 PM IST
Rishi Panchami Vrat Katha: यहां पढ़ें ऋषि पंचमी व्रत की कथा
rishi panchami vrat ki katha 2019 live

Rishi Panchami 2019, Vrat Katha and Images: ऋषि पंचमी व्रत की कथा: एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया. कन्या ने सारी बात मां से कही. मां ने पति से सब कहते हुए पूछा- प्राणनाथ! मेरी साध्वी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है?

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 3, 2019, 3:21 PM IST
  • Share this:
ऋषि पंचमी की कथा (Rishi Panchami Vrat Katha): हिंदू पंचांग के मुताबिक़, आज ऋषि पंचमी मनाई जा रही है. धर्म शास्त्रों में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सप्त ऋषि की पूजा करने और उपवास रखने के महत्व का उल्लेख किया गया है. पूजा के दौरान सप्तऋषि मंडल में शामिल सभी सातों ऋषियों कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि तथा वशिष्ठ की पति देवी अरुंधती की विधिवत पूजा करने और उपवास करने का प्रचलन है. इसके बाद भक्तों को किसी योग्य विद्वान् से ऋषि पंचमी की कथा सुननी चाहिए. आइए जानते हैं ऋषि पंचमी की कथा...

ऋषि पंचमी की कथा...

बहुत समय पहले की बात है विदर्भ देश में एक सदाचारी ब्राह्मण रहता था. उसकी पत्नी बड़ी पतिव्रता थी, जिसका नाम सुशीला था. उस ब्राह्मण के एक पुत्र और एक पुत्री दो संतान थी. विवाह योग्य होने पर उसने समान कुलशील वर के साथ कन्या का विवाह कर दिया. दैवयोग से कुछ दिनों बाद वह विधवा हो गई. दुखी ब्राह्मण दम्पति कन्या सहित गंगा तट पर कुटिया बनाकर रहने लगे. एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया. कन्या ने सारी बात मां से कही. मां ने पति से सब कहते हुए पूछा- प्राणनाथ! मेरी साध्वी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है?

rishi panchmi katha
rishi panchmi katha


ब्राह्मण ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया- पूर्व जन्म में भी यह कन्या ब्राह्मणी थी. इसने रजस्वला होते ही बर्तन छू दिए थे. इस जन्म में भी इसने लोगों की देखा-देखी ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया. इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं. हिंदू धर्म-शास्त्रों में वर्णित है कि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी, दूसरे दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है. वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है. यदि यह शुद्ध मन से अब भी ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी. पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया. व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई. अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय सुखों का भोग मिला.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए कल्चर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 3, 2019, 3:02 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...