Sakat Chauth 2021: जानें सकट चौथ के दिन आपके शहर में कब दिखेगा चांद, ये है पूरा ब्‍योरा

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है.

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है.

सकट चौथ (Sakat Chauth) को हिंदू धर्म में विशेष महत्‍व दिया गया है. इस दिन महिलाएं संतान की सलामती के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान गणेश की पूजा करती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 2:19 PM IST
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Sakat Chauth 2021: संतान की सलामती और लंबी उम्र के लिए किया जाने वाला माघी सकट चौथ व्रत इस बार 31 जनवरी, रविवार के दिन पड़ रहा है. इसे संकष्टी चौथ भी कहा जाता है. इसके कई अन्‍य नाम भी हैं. जिनमें तिलकुटा चौथ, गणेश चौथ, संकटा चौथ और माघी चतुर्थी प्रमुख हैं. माघ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को पड़ने वाले इस चौथ के दिन महिलाएं गणेश गौरा की पूजा अर्चना करती हैं और दिन भर व्रत  (Sakat Chauth Vrat) का पालन करती हैं. यह व्रत भी खास होता है जिसमें महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को चांद को देखने और पूजा अर्चना के बाद ही व्रत खोलती हैं. इस दिन को हिंदू धर्म में विशेष महत्‍व दिया गया है.

तो आइए जानते हैं कि किस शहर में चांद को लोग कब देख सकेंगे और अपना व्रत संपन्‍न कर पाएंगे.

पटना- 20:11

भागलपुर- 20:03
गया- 20:12

रांची- 20:12

यूपी-  20:39



वाराणसी- 20:20

लखनऊ- 20:27

गाजियाबाद- 20:40

बरेली- 20:32

प्रयागराज- 20:25

मेरठ- 20:39

मुंबई- 21:07

इंदौर- 20:52

पुणे- 21:04

सकट चौथ 2021 व्रत का शुभ मुहूर्त:

सकट चौथ व्रत तिथि: जनवरी 31, 2021 (रविवार)

चतुर्थी तिथि का शुभारंभ: 31 जनवरी, 2021 को शाम 20:24 बजे चतुर्थी तिथि लगेगी.

चतुर्थी तिथि का समापन: 01 फरवरी, 2021 को शाम 18:24 बजे चतुर्थी तिथि का समापन.

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सकट चौथ पूजन विधि:

गणेश चतुर्थी के दिन पूरे मन से भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने की परंपरा है. इस‍ दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और गणेश भगवान के साथ ही चंद्र देव की पूजा करती हैं. दिनभर निर्जला उपवास रखने के बाद रात में चंद्रमा के दर्शन के साथ ही महिलाएं कुश से अर्घ्य देती हैं. पूजा के दौरान यहां हवनकुंड की परिक्रमा की जाती है और महिलाएं चंद्र देव से अपने बच्चों की सलामती के लिए प्रार्थना करती हैं. पूजा के दौरान गणेश भगवान का मंत्र- 'ॐ गं गणपतयै नम:' बोलते हुए 21 दूर्वा घास अर्पित किया जाता है और भगवान गणेश को बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग चढ़ाया जाता है. पूजा समापन के साथ ही महिलाएं दूध और शकरकंद खाकर अपना व्रत खोलती हैं. (लाइव हिन्‍दुस्‍तान से साभार(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) 
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