Sakat Chauth 2021: संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है सकट चौथ व्रत, जानें इसका महत्व

सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है. (फोटो साभार: instagram/ganpati644)

सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा की जाती है. (फोटो साभार: instagram/ganpati644)

Sakat Chauth 2021: सकट चौथ व्रत (Sakat Chauth Vrat) को कई नामों से जाना जाता है. कई जगह इसे संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी और तिलकूटा पर्व के नाम से भी जानते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 1:13 PM IST
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Sakat Chauth 2021: इस बार सकट चौथ का व्रत 31 जनवरी को रविवार के दिन रखा जाएगा. सकट चौथ व्रत (Sakat Chauth Vrat) को कई नामों से जाना जाता है. कई जगह इसे संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुंडी चतुर्थी और तिलकूटा पर्व के नाम से भी जानते हैं. इस दिन भगवान गणेश (Lord Ganesha) की पूजा अर्चना की जाती है. भगवान गणेश को तिलकूट का प्रसाद चढ़ाया जाता है. साथ ही महिलाएं गणेश भगवान की पूजा अर्चना करती हैं और निर्जला व्रत करती हैं. शाम को गणेश जी की कथा सुनकर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत को खोला जाता हैं. इस व्रत का अपना अलग महत्‍व है. यह व्रत मांएं अपनी संतान की सलामती और उनकी लंबी आयु की कामना के लिए करती हैं. आइए जानें इस व्रत का महत्‍व.

सकट चौथ व्रत का महत्व

सकट चौथ व्रत का अपना अलग महत्‍व है. इसे माताएं अपनी संतान की सलामती के लिए इस कामना के साथ रखती हैं कि उनकी संतान सुखी, स्वस्थ रहे और दीर्घायु हो. मान्यता है कि सकट चौथ पर अगर भगवान गणेश की पूजा की जाए और यह व्रत रखा जाए तो गणेश जी प्रसन्‍न होते हैं और सारे संकटो को दूर करते हैं. वैसे तो संकट चौथ या संकष्टी चौथ हर महीने में पड़ता है, लेकिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को पड़ने वाले सकट चौथ का अलग ही धार्मिक महत्व है. इस अवसर पर लोग अपने घरों में तिल और गुड़ की चीजें बनाते हैं. साथ ही भगवान को तिलकूट चढ़ाया जाता है.

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हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करना फलदायी माना जाता है. इस दिन भगवान गणेश के साथ ही चंद्र देव की भी पूजा-अर्चना की जाती है. महिलाएं पूरा दिन निर्जला उपवास रहने के बाद रात में जब चंद्रमा दिखाई पड़ता है. तो उसे अर्घ्य देकर छोटा-सा हवन करती हैं. हवनकुंड की परिक्रमा के बाद महिलाएं चंद्र देव के दर्शन करते हुए हाथ जोड़ कर उनसे अपने बच्चों की बेहतरी के लिए प्रार्थना करती हैं. इसके बाद दूध और शकरकंद खाकर यह व्रत खोला जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)
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