Sankashti Chaturthi 2020: संकष्टी चतुर्थी पर पूजा के बाद पढ़ें ये व्रत कथा

Sankashti Chaturthi 2020: संकष्टी चतुर्थी पर पूजा के बाद पढ़ें ये व्रत कथा
संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें

संकष्टी चतुर्थी 2020 (Sankashti Chaturthi 2020 Today): पौराणिक एवं प्रचलित श्री गणेश कथा के अनुसार एक बार देवता कई विपदाओं में घिरे थे. तब वह मदद मांगने भगवान शिव के पास आए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 7:04 AM IST
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संकष्टी चतुर्थी 2020 (Sankashti Chaturthi 2020 Today): आज 5 सितंबर को संकष्टी चतुर्थी है. हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi)है. संकष्टी चतुर्थी वैसे तो हर माह पड़ती है लेकिन आश्विन माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है. संकष्टी चतुर्थी गणेश भगवान को समर्पित मानी जाती है. इस दिन लोग गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं. हिंदू धर्म में गणेश भगवान को बुद्धि, विवेक का स्वामी माना गया है. इसके अलावा गणेश जी को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. यही वजह है कि लोग किसी भी पूजा में सबसे पहले गणेश भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं. मान्यता है कि जो जातक सच्चे ह्रदय से संकष्टी चतुर्थी के व्रत को करता है उसपर गणेश भगवान का आशीर्वाद बना रहता है. आइए पढ़ते हैं संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा....

पौराणिक एवं प्रचलित श्री गणेश कथा के अनुसार एक बार देवता कई विपदाओं में घिरे थे. तब वह मदद मांगने भगवान शिव के पास आए. उस समय शिव के साथ कार्तिकेय तथा गणेशजी भी बैठे थे. देवताओं की बात सुनकर शिव जी ने कार्तिकेय व गणेश जी से पूछा कि तुम में से कौन देवताओं के कष्टों का निवारण कर सकता है. तब कार्तिकेय व गणेश जी दोनों ने ही स्वयं को इस कार्य के लिए सक्षम बताया.

इस पर भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा लेते हुए कहा कि तुम दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा वही देवताओं की मदद करने जाएगा.



भगवान शिव के मुख से यह वचन सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए, परंतु गणेश जी सोच में पड़ गए कि वह चूहे के ऊपर चढ़कर सारी पृथ्वी की परिक्रमा करेंगे तो इस कार्य में उन्हें बहुत समय लग जाएगा. तभी उन्हें एक उपाय सूझा. गणेश अपने स्थान से उठें और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा करके वापस बैठ गए. परिक्रमा करके लौटने पर कार्तिकेय स्वयं को विजेता बताने लगे. तब शिव जी ने श्री गणेश से पृथ्वी की परिक्रमा ना करने का कारण पूछा.
तब गणेश ने कहा - 'माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं.' यह सुनकर भगवान शिव ने गणेश जी को देवताओं के संकट दूर करने की आज्ञा दी. इस प्रकार भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप दूर होंगे. इस व्रत को करने से व्रतधारी के सभी तरह के दुख दूर होंगे और उसे जीवन के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी. चारों तरफ से मनुष्य की सुख-समृद्धि बढ़ेगी. पुत्र-पौत्रादि, धन-ऐश्वर्य की कमी नहीं रहेगी. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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