Santoshi Mata Vrat: संतोषी माता दूर करती हैं सारे दुख, जानें व्रत, पूजा विधि और महत्व

संतोषी माता आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं

संतोषी माता आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं

Santoshi Mata Vrat Puja Vidhi And Importance- भगवान गणेश ने संतोषी माता को बनाया. माता संतोषी ने अपने बड़े भाइयों की इच्छाओं को पूरा किया, इसलिए उनका नाम संतोषी रखा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 12, 2021, 11:29 AM IST
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Santoshi Mata Vrat: हिंदू धर्म के अनुसार शुक्रवार (Friday) के दिन शक्ति की देवी संतोषी माता (Santoshi Mata) की पूजा की जाती है. उपवास (Vrat) की इस विधि को 16 शुक्रवार व्रत भी कहा जाता है, जिसमें कुल 16 लगातार शुक्रवार के लिए उपवास करते हैं. सफेद रंग का शुक्रवार को विशेष महत्व होता है. शुक्रवार को उपवास भोर से शुरू होता है और शाम को खत्म होता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संतोषी माता का नियम पूर्वक व्रत करना अत्यंत फलदायी होता है और इस व्रत के पालन से घर में सुख समृद्धि आती है. आइए आपको बताते हैं कि किस तरह से संतोषी माता का व्रत करना चाहिए और क्या है इस व्रत का महत्त्व.

संतोषी माता व्रत और पूजन विधि:

-पूजा करने से पूर्व जल से भरे पात्र के ऊपर एक कटोरी में गुड़ और भुने हुए चने रखें.

-दीपक जलाएं और व्रत कथा कहते समय हाथों में गुड़ और भुने हुए चने रखें.
-दीपक के आगे या जल के पात्र को सामने रख कर कथा प्रारंभ करें तथा कथा पूरी होने पर आरती करें और प्रसाद का भोग लगाएं.

-संतोषी माता के अनुष्ठानों के दौरान, पहली प्रार्थना संतोषी माता के पिता भगवान गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि के लिए करनी चाहिए.

-संतोषी माता आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करती हैं और व्यवसाय में सफलता लाती हैं.



-देवी से संतान, व्यापार में लाभ, आमदनी में वृद्धि, भावनाओं और दुखों को दूर करने की प्रार्थना करें.

-इस दिन पूरे दिन भोजन ग्रहण न करें.

-16 शुक्रवार तक नियम पूर्वक व्रत करें और शुक्रवार को व्रत के दौरान फलाहार ग्रहण करें.

-भोजन में घर में खट्टी खाद्य सामग्रियों का उपभोग न करें और परिवार जनों को भी खट्टे भोजन से दूर रहना चाहिए.

व्रत का महत्त्व

शुक्रवार के उपवास के स्पष्ट कारणों में से एक है कि उस दिन संतोषी माता का जन्म हुआ था. कुछ लोग संतोषी माता को शक्ति या शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजते हैं जो उनके सभी दुख और चिंताओं को दूर कर सकती हैं. इसी तरह, अन्य लोग अपने जीवन से बाधाओं को दूर करने, अपने बच्चों को स्वस्थ रखने और एक खुशहाल पारिवारिक जीवन जीने के लिए शुक्रवार का उपवास करते हैं. शुक्रवार को उपवास करने और इसी दिन संतोषी मां की पूजा करने की अवधारणा के पीछे एक सच्ची कहानी है. किंवदंतियों के अनुसार, भगवान गणेश के पुत्र, शुभ और लाभ, रक्षा बंधन के रिवाज के महत्व को समझना चाहते थे और वे एक छोटी बहन की इच्छा रखते थे. इस प्रकार, भगवान गणेश ने संतोषी माता को बनाया. माता संतोषी ने अपने बड़े भाइयों की इच्छाओं को पूरा किया, इसलिए उनका नाम संतोषी रखा गया.

उद्यापन करें ऐसे:

पूजा के अंतिम दिन, यानी, संतोषी माता व्रत उद्यापन के दिन, संतोषी माता की तस्वीर के सामने घी का दीया जलाएं और संतोषी माता की जय बोलते रहें तथा नारियल फोड़ें. इस विशेष दिन पर घर में कोई भी खट्टी वस्तु नहीं रखनी चाहिए और न ही कोई खट्टी वस्तु खाएं और न ही दूसरों को परोसें. उद्यापन के लिए संतोषी माता के अनुष्ठानों के अंतिम दिन में आठ लड़कों को त्योहार का भोजन परोसा जाता है. व्रत रखने वाले व्यक्ति को कथा सुनने के बाद और केवल एक समय भोजन करना चाहिए. इस तरह, देवी संतोषी माता खुश हो जाती हैं और दुख को दूर करती हैं और अपने भक्तों को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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