सावन के मंगलवार को रखा जाता है मंगला गौरी व्रत, मिलता है अद्भुत फल!

Sawan 2019, Mangala Gauri Vrat: माता मंगला गौरी स्‍वयं आशीर्वाद देती हैं. मंगला गौरी सुहाग और गृहस्‍थ सुख की देवी मानी जाती हैं.

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 5:57 PM IST
सावन के मंगलवार को रखा जाता है मंगला गौरी व्रत, मिलता है अद्भुत फल!
सावन 2019 मंगला गौरी व्रत विधि
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Updated: July 23, 2019, 5:57 PM IST
श्रावण मास, सावन: सावन माह लग चुका है. यह माह बेहद पवित्र और भगवान शिव की भक्ति के लिए जाना जाता है. सावन माह में प्रत्‍येक मंगलवार को 'मंगला गौरी व्रत' मनाया जाता है. भविष्यपुराण और नारदपुराण के अनुसार श्रावण मास में मंगलवार को व्रत-उपवास रखने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है. इस दिन देवी पार्वती की पूजा गौरी स्वरूप में की जाती है. पुराणों में इस बात का वर्णन है कि इस व्रत को करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य मिलता है. इस दिन व्रत करने वाली महिलाओं को माता मंगला गौरी स्‍वयं आशीर्वाद देती हैं. मंगला गौरी सुहाग और गृहस्‍थ सुख की देवी मानी जाती हैं.

स्त्रियां अपने पति और संतान की लंबी उम्र की कामना में यह व्रत करती हैं. ज्‍योतिष विज्ञान कहता है कि जिन युवतियों की कुंडली में विवाह का योग कमजोर होता है अथवा जिनके रिश्‍ते टूट जाने की संभावना होती है, उन्‍हें विशेष रूप में सावन के प्रत्‍येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत करना चाहिए. साथ ही उन्‍हें 16 सोमवार का व्रत भी रखना चाहिए. कहते हैं कि भक्ति और आराधना में बहुत ताकत होती है. मान्यता है कि माता मंगला गौरी का रूप धारण की हुई पार्वती यदि प्रसन्‍न हो जाएं तो कुंडली में लिखे दुर्भाग्‍य को भी मिटा सकती हैं. एक बार मंगला गौरी का व्रत प्रारंभ करने के बाद लगातार पांच वर्षों तक किया जाना जरूरी होता है. उसके बाद इस व्रत का विधि-विधान से उद्यापन कर देना चाहिए.

कैसे करें व्रत :

1- इस व्रत के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में उठें.

2- नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले वस्त्र पहनें.
3- एक साफ-सुथरा पीढ़ा लें और उस पर लाल और सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं. कपड़े को ऐसे बिछाएं कि आधे पीढ़े पर लाल और आधे पर सफेद रंग का कपड़ा हो.
4- अब सफेद कपड़े पर चावल से नौ छोटी ढ़ेरी बना दें. ये नवग्रह होते हैं.
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5- लाल कपड़े पर गेहूं से सोलह ढ़ेरी बना दें. गेंहू की यह 16 ढेरियां सोडष मातृका होती हैं.
6- एक जगह थोड़े चावल रख लें और वहां गणेश जी को आह्वान करें.
7- पीढ़े पर एक जगह गेहूं की एक ढ़ेरी बना लें और फिर उस पर जल कलश रखें.
8- जल कलश में आम की या अशोक की पांच पत्तियां, एक सुपारी और दक्षिणा के लिए सिक्का रखा जाता है.
9- कलश पर ढक्कन लगा होना चाहिए और उस पर थोड़े चावल रखे जाने चाहिए.
10- अब थोड़ी सी दूब लें और उसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर कलश के ढक्कन पर रख दें.
11- आटे से बना चार मुख वाला दीपक बत्ती और घी लगाकर जलायें और सोलह अगरबत्ती जलायें.
12- माता मंगला गौरी की पूजा का संकल्प लें.
13- उसके बाद नवग्रह और षोडश मातृका की पूजा करें.
14- षोडश मातृका के पूजन में जनेऊ नहीं चढ़ाया जाता है. इस पूजा में हल्दी, मेहंदी और सिन्दूर चढ़ता है.
15- अब मां मंगला गौरी के पूजन का वक्त हो गया है.
16- थाली में चकला और आटे से बना हुआ सिलबट्टा रखें.
17- अब मिट्टी से माता मंगला गौरी की एक मूर्ति बनाएं और उसे चकले पर रखें.
18- मां मंगला गौरी को जल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी और पंचामृत से स्नान करायें.
19- इस व्रत में एक ही वक्‍त अन्‍न ग्रहण किया जाता है और पूरे दिन मां मंगला गौरी की पूजा की जाती है.
20- पूजा में 'मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये’ मंत्र का जाप किया जाता है.
21- पूजन के बाद माता मंगला गौरी को 16 मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, पान, लड्डू, सुहाग सामग्री, 16 चूड़ियां और मिठाई चढ़ाई जाती है.
22- याद रखें कि माता को चढ़ाई जा रही प्रत्‍येक सामग्री 16 होनी चाहिए.
23- इसके अलावा 5 प्रकार के सूखे मेवे, 7 प्रकार के अनाज-धान्य (गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि होना चाहिए. पूजन के बाद मंगला गौरी की कथा सुनी जाती है.
24- आटे से बने दीपक में 16 बत्तियां जलाकर देवी के सामने रखी जाती हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: July 23, 2019, 7:49 AM IST
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