Sawan 2019: इस दिशा में बैठकर करें शिव की पूजा, होंगी सारी मनोकामनाएं पूर्ण!

पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा में बैठना भी उचित नहीं रहता है. क्योंकि इस दिशा में शिव जी की पीठ होती है. जिस कारण पीछे से देवपूजा करने से शुभ फल नहीं मिलता है

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 5:54 PM IST
Sawan 2019: इस दिशा में बैठकर करें शिव की पूजा, होंगी सारी मनोकामनाएं पूर्ण!
पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा में बैठना भी उचित नहीं रहता है. क्योंकि इस दिशा में शिव जी की पीठ होती है. जिस कारण पीछे से देवपूजा करने से शुभ फल नहीं मिलता है
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Updated: July 23, 2019, 5:54 PM IST
श्रावण मास में भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है. जो व्यक्ति सावन में प्रतिदिन पूजा नहीं कर सकते, उन्हें सोमवार के दिन शिव पूजा और व्रत रखना चाहिए. सावन में पार्थिव शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. श्रावण मास में जितने सोमवार पड़ते हैं, उन सब में यदि व्रत रखकर विधिवत पूजन किया तो मन की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
सावन में शिव क्यों होते हैं खास

सावन के महीने में शिव जी इतने सरल और शांत दिखते हैं. सावन में प्रेम प्रफुल्लित होकर अपना काम रूप धारण कर लेता है. सावन के माह में प्रत्येक सोमवार को शिव जी का विधिवत जल से अभिषेक कर पूजन करने पर चंद्रमा बलवान होकर मन को ऊर्जावान बना देता है. लड़कियां सोलह सोमवारों का व्रत रखकर प्रेम करने वाले पति की कामना करती हैं, इसके पीछे भी चंद्रमा ही कारक है क्योंकि चंद्रमा मन का संकेतक है. सच्चा प्रेम मन से ही किया जाता है.

सावन के महीने में पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसमें पूजन करने से सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं. लेकिन शिव की पूजा में कुछ विशेष सावधानियां भी बरतने की जरूरत है. जैसा शास्त्रों में बताया गया है यदि उसी विधि-विधान से संपूर्ण नियमों का पालन करते हुए शिव की पूजा की जाए तो मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है. आइए जानते हैं कि शास्त्रों में शिव की पूजा के क्या नियम बताए गए हैं.

शास्त्रों में शिवलिंग पूजा के कुछ नियम-विधान बताए गए हैं

1. जिस जगह पर शिवलिंग स्थापित हो, उससे पूर्व दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठना चाहिए.

2. शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठें. क्योंकि इस दिशा में भगवान शिव जी का बांया अंग होता है एंव शक्तिरूपा देवी उमा का स्थान होता है.
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3. पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा में बैठना भी उचित नहीं रहता है. क्योंकि इस दिशा में शिव जी की पीठ होती है. जिस कारण पीछे से देवपूजा करने से शुभ फल नहीं मिलता है.

4. शिवलिंग से दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है.

5. उज्जैन के दक्षिणामुखी महाकाल और अन्य दक्षिणामुखी शिवलिंग पूजा का बहुत अधिक धार्मिक महत्च है.

6. शिवलिंग पूजा में दक्षिण दिशा में बैठकर करके साथ में भक्त को भस्म का त्रिपुण्ड लगाना चाहिए, रूद्राक्ष की माला पहननी चाहिए और बिना कटे-फटे हुए बिल्वपत्र अर्पित करना चाहिए. यदि साबुत विल्बपत्र न मिले तो विल्बपत्र का चूर्ण भी चढ़ाया कल्चरजा सकता है.

7. शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए. आधी परिक्रमा करना ही शुभ होता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: July 17, 2019, 2:05 PM IST
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