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Mangla Gauri Vrat 2021: मंगला गौरी व्रत से मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी और अखंड सौभाग्य, पढ़ें कथा

मंगला गौरी व्रत से ही मां पार्वती ने शिव जी को विवाह के लिए राजी किया था

मंगला गौरी व्रत से ही मां पार्वती ने शिव जी को विवाह के लिए राजी किया था

Mangla Gauri Vrat Katha To Please Devi Parvati And For Suitable Life Partner: कुंवारी लड़की इस दिन मां पार्वती की पूजा कर उनसे सुयोग्य वर की कामना करती है, तो माता उस कामना को जरूर पूरा करती हैं. मान्यता है कि इस व्रत को शुरू करने के बाद कम से कम पांच साल तक रखा जाता है. हर साल सावन में 4 या 5 मंगलवार के व्रत होते हैं.

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    Mangla Gauri Vrat Katha To Please Devi Parvati And For Suitable Life Partner: आज मंगला गौरी व्रत है. सुबह उठकर लोगों ने भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा (Devi Parvati Worship)अर्चना की. पौराणिक, मान्यता है कि इस व्रत को रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही दीर्घायु मिलती है. यदि नव विवाहित स्त्री इस व्रत को रखती हैं तो उनका पूरा वैवाहिक जीवन सुखपूर्ण रहता है. मनचाहे जीवनसाथी की इच्छा रखने वाले जातक भी मंगला गौरी का व्रत रखते हैं और मां पार्वती की पूजा करते हैं. सावन के महीने में ही माता पार्वती की तपस्या से महादेव प्रसन्न हुए थे और उनसे विवा​ह के लिए राजी हो गए थे. कहते हैं कि अगर कोई कुंवारी लड़की इस दिन मां पार्वती की पूजा कर उनसे सुयोग्य वर की कामना करती है, तो माता उस कामना को जरूर पूरा करती हैं. मान्यता है कि इस व्रत को शुरू करने के बाद कम से कम पांच साल तक रखा जाता है. हर साल सावन में 4 या 5 मंगलवार के व्रत होते हैं. आखिरी व्रत वाले दिन उद्यापन किया जाता है. आइए पढ़ें मंगला गौरी व्रत की पौराणिक कथा...

    मंगला गौरी व्रत कथा:

    पौराणिक कथा के अनुसार. प्राचीन काल में एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी रहता था. उसकी पत्नी काफी खूबसूरत थी और उसके पास काफी संपत्ति थी. लेकिन उनके कोई संतान नहीं होने के कारण वे काफी दुखी रहा करते थे.

    यह भी पढ़ें: Mangala Gauri Vrat 2021: कल है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, जानें कैसे करें माता पार्वती की पूजा

    ईश्वर की कृपा से उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई लेकिन वह अल्पायु था. उसे यह श्राप मिला था कि 16 वर्ष की उम्र में सांप के काटने से उसकी मौत हो जाएगी. संयोग से उसकी शादी 16 वर्ष से पहले ही एक युवती से हुई जिसकी माता मंगला गौरी व्रत किया करती थी.

    परिणामस्वरूप उसने अपनी पुत्री के लिए एक ऐसे सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया था जिसके कारण वह कभी विधवा नहीं हो सकती थी. इस वजह से धरमपाल के पुत्र ने 100 साल की लंबी आयु प्राप्त की.

    इस कारण से सभी नवविवाहित महिलाएं इस पूजा को करती हैं तथा गौरी व्रत का पालन करती हैं तथा अपने लिए एक लंबी, सुखी तथा स्थायी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. जो महिला उपवास का पालन नहीं कर सकतीं, वे भी कम से कम इस पूजा तो करती ही हैं.

    इस कथा को सुनने के बाद विवाहित महिला अपनी सास तथा ननद को 16 लड्डू देती है. इसके बाद वे यही प्रसाद ब्राह्मण को भी देती है. इस विधि को पूरा करने के बाद व्रती 16 बाती वाले दीये से देवी की आरती करती है.

    व्रत के दूसरे दिन बुधवार को देवी मंगला गौरी की प्रतिमा को नदी या पोखर में विसर्जित कर दी जाती है. अंत में मां गौरी के सामने हाथ जोड़कर अपने समस्त अपराधों के लिए एवं पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें. इस व्रत और पूजा को परिवार की खुशी के लिए लगातार 5 वर्षों तक किया जाता है.

    अत: शास्त्रों के अनुसार यह मंगला गौरी व्रत नियमानुसार करने से प्रत्येक मनुष्य के वैवाहिक सुख में बढ़ोतरी होकर पुत्र-पौत्रादि भी अपना जीवन सुखपूर्वक गुजारते हैं, ऐसी इस व्रत की महिमा है. .(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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