Sawan Shivratri 2019: आज है सावन की शिवरात्रि, जानिए पूजा की विधि, नियम और मंत्र

Sawan Shivratri 2019: सावन की शिवरात्रि के दिन के शिव जी की पूजा के लिए खास विधि विधान बताए गए हैं. इस दिन व्रत को करने से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि के बंधन से मुक्त होता है.

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Updated: July 30, 2019, 5:38 AM IST
Sawan Shivratri 2019: आज है सावन की शिवरात्रि, जानिए पूजा की विधि, नियम और मंत्र
Sawan Shivratri, सावन शिवरात्रि
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Updated: July 30, 2019, 5:38 AM IST
Sawan Shivratri 2019: आज 30 जुलाई को सावन माह की शिवरात्रि है. हिंदू धर्म में सावन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि को बेहद ख़ास माना गया है. हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहा जाता है और यह तिथि भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है. किंतु सावन माह की शिवरात्रि का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, पूरे सावन माह के दौरान भगवान शिव माता पारवती और समस्त परिवार और शिवगणों सहित धरती पर ही निवास करते हैं. इसलिए सावन माह में शिवरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है.

सावन की शिवरात्रि के दिन के शिव जी की पूजा के लिए खास विधि विधान बताए गए हैं. इस दिन व्रत को करने से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि के बंधन से मुक्त होता है. शिवरात्रि व्रत में शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय और शिवगणों की पूजा होती है.

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शिवरात्रि व्रत की विधि:

शिवरात्रि व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय जी और शिवगणों की पूजा की जाती है. पूजा के प्रारम्भ में भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है. अभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी, गंगाजल तथा गन्ने के रस को शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है.

अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, समीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं. अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रुप में चढ़ाया जाता है. शिव चतुर्दशी के दिन पूरा दिन निराहार रहकर इनके व्रत का पालन करना चाहिए.

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शिवरात्रि व्रत के नियम:
शिवरात्रि का व्रत करने वाले लोगों को केवल एक समय भोजन करना चाहिए. सुबह नित्यकर्म के बाद व्रत का संकल्प लेकर धूप, दीप पुष्प आदि से शिव जी की पूजा करें. पूजा में भांग, धतूरा और बेलपत्र का विशेष महत्व है.

शिव मंत्रों का जाप शिव मंदिर या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है. चतुर्दशी व्रत पूरा होने के बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाना चाहिए. इसके बाद स्वयं भोजन करना चाहिए. रात्रि के समय शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए.

रात में करें इन शिव मंत्रों का जाप:
शंकराय नमसेतुभ्यं नमस्ते करवीरक
त्र्यम्बकाय नमस्तुभ्यं महेश्र्वरमत: परमनमस्तेअस्तु महादेवस्थाणवे च ततछ परमू
नमः पशुपते नाथ नमस्ते शम्भवे नमः
नमस्ते परमानन्द नणः सोमार्धधारिणे
नमो भीमाय चोग्राय त्वामहं शरणं गतः
पाप होते हैं नष्ट:
जो भी भक्तजन पूरे श्रद्धाभाव से शिव चतुर्दशी का व्रत करते हैं उनके माता- पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. वह जीवन के सम्पूर्ण सुखों का भोग करता है. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य, संतान एवं विद्या आदि प्राप्त कर अंत में शिवलोक जाता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: July 30, 2019, 5:38 AM IST
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