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Sawan Somvar 2020: 20 जुलाई को सावन का तीसरा सोमवार, जानें कितने प्रकार के शिवलिंग की होती है पूजा

सावन अमावस्या की पूजा विधि

सावन अमावस्या की पूजा विधि

भोलेनाथ (Lord Shiva) को खुश करने के लिए भक्त उनके लिंग रूप की पूजा करते हैं. शिव पुराण (Shiv Puran) में शिवलिंग तीन प्रकार के बताए गए हैं. इन्‍हें उत्तम, मध्यम और अधम कहा गया है.

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    सावन के महीने (Sawan Month) को भगवान श‍िव (Lord Shiva) की पूजा और मनोकामनाओं की पूर्ति का महीना माना जाता है. मान्‍यता है क‍ि इस महीने में की गई पूजा-अर्चना से भोलेनाथ खुश होते हैं और मनचाहा वर देते हैं. ऐसे में अगर आप सावन के महीने में भगवान शिव की व‍िशेष पूजा-पाठ करने में सक्षम नहीं हैं तो केवल सोमवार (Monday) के द‍िन व्रत करके पूजा कर सकते हैं. सावन महीने का तीसरा सोमवार 20 जुलाई को पड़ रहा है. इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं क‍ि आखिर क‍ितने प्रकार के श‍िवल‍िंग होते हैं और इनकी पूजा का क्‍या व‍िधान है? महादेव ही एक मात्र ऐसे देव हैं जिनकी पूजा मूर्त रूप की बजाय लिंग रूप में अधिक फलदायी मानी जाती है. यही कारण है कि मंदिरों में भगवान शिव लिंग रूप में व‍िराजते हैं.

    श‍िवल‍िंग के पहले प्रकार को उत्तम शिवलिंग कहते हैं
    भोलेनाथ को खुश करने के लिए भक्त उनके लिंग रूप की पूजा करते हैं. शिव पुराण में शिवलिंग तीन प्रकार के बताए गए हैं. इन्‍हें उत्तम, मध्यम और अधम कहा गया है. श‍िवल‍िंग के पहले प्रकार को उत्तम शिवलिंग कहते हैं. उत्‍तम श‍िवलिंग उसे कहते हैं जिसके नीचे वेदी बना हो और वह वेदी से चार अंगुल ऊंचा हो. इसे ही सबसे अच्छा यानी क‍ि उत्‍तम शिवलिंग माना गया है. दूसरे प्रकार के श‍िवल‍िंग को मध्यम और तीसरे प्रकार के श‍िवल‍िंग को अधम श्रेणी का श‍िवलिंग कहा गया है. जो शिवलिंग वेदी से चार अंगुल से कम होता है वह मध्यम माना गया है. वहीं जो इससे भी कम हो वह अधम श्रेणी का माना गया है.

    उत्तर की ओर बैठकर या खडे़ होकर पूजा करने से देवी पार्वती का अपमान होता है
    श‍िव पुराण के अनुसार शिवलिंग की पूजा करते समय मुख सदैव उत्तर की ओर रखना चाहिए क्‍योंक‍ि पूर्व दिशा की ओर खडे़ होकर या बैठकर शिवलिंग की पूजा करने से शिव के सामने का भाग बाधित होता है जो शुभफलदायी नहीं होता है. कहा जाता है क‍ि उत्तर की ओर बैठकर या खडे़ होकर पूजा करने से देवी पार्वती का अपमान होता है क्योंकि यह शिव का बायां भाग पड़ता है जहां देवी पार्वती का स्थान है. इसलिए दक्षिण दिशा में बैठकर सामने की ओर यानी उत्तर की ओर मुख करके शिवलिंग की पूजन करनी चाह‍िए. ऐसा करने से भक्त को माता पार्वती और भोलेनाथ की कृपा म‍िलती है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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