Sawan Somvar 2020: कल है सावन माह का पहला सोमवार, ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

मान्यता है कि सावन माह अकेला ऐसा महीना होता है, जब शिव भक्त महादेव को खुश कर, बेहद आसानी से उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.
मान्यता है कि सावन माह अकेला ऐसा महीना होता है, जब शिव भक्त महादेव को खुश कर, बेहद आसानी से उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.

अगर कुंडली में विवाह (Maariage) का योग न हो या विवाह होने में अड़चने आ रही हो तो संकल्प लेकर सावन के सोमवार (Sawan Somvar) का व्रत करना चाहिए.

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कल यानी 6 जुलाई से वर्ष 2020 के सावन मास (Sawan Month) के सोमवार (Monday) की शुरुआत होने वाली है. हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास से ही व्रत और पर्वों की शुरुआत भी हो जाती है. हिन्दू धर्म में, श्रावण मास का विशेष महत्व बताया गया है. खासतौर से भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना और उनकी भक्ति के लिए कई हिन्दू ग्रंथों में भी इस माह को विशेष महत्व दिया गया है. मान्यता है कि सावन माह अकेला ऐसा महीना होता है, जब शिव भक्त महादेव को खुश कर, बेहद आसानी से उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. ये माह भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान और भगवान शिव के रुद्राभिषेक का भी विशेष महत्व होता है.

क्या है सावन के सोमवार के व्रत का महत्व ?

भगवान शिव की पूजा के लिए और खास तौर से वैवाहिक जीवन के लिए सोमवार की पूजा की जाती है.



अगर कुंडली में विवाह का योग न हो या विवाह होने में अड़चने आ रही हों तो संकल्प लेकर सावन के सोमवार का व्रत किया जाना चाहिए.
अगर कुंडली में आयु या स्वास्थ्य बाधा हो या मानसिक स्थितियों की समस्या हो तब भी सावन के सोमवार का व्रत श्रेष्ठ परिणाम देता है.

सोमवार व्रत का संकल्प सावन में लेना सबसे उत्तम होता है, इसके अलावा इसको अन्य महीनों में भी किया जा सकता है.

इसमें मुख्य रूप से शिव लिंग की पूजा होती है और उस पर जल तथा बेल पत्र अर्पित किया जाता है.

इसे भी पढ़ेंः सावन सोमवार 2020: आखिर क्यों भगवान शिव को प्रिय है सावन का महीना, ये है कारण

सावन के सोमवार की पूजा विधि

प्रातः काल स्नान करने के बाद शिव मंदिर जाएं.

घर से नंगे पैर जाएं और घर से ही लोटे में जल भरकर ले जाएं. लॉकडाउन में आप घर पर भी जल चढ़ा सकते हैं.

शिवलिंग पर जल अर्पित करें, भगवान को साष्टांग प्रणाम करें.

खड़े होकर शिव मंत्र का 108 बार जाप करें.

सायंकाल भगवान के मंत्रों का फिर जाप करें तथा उनकी आरती करें.

पूजा की समाप्ति पर केवल जलीय आहार ग्रहण करें.

अगले दिन पहले अन्न वस्त्र का दान करें तब जाकर व्रत का पारायण करें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें).
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