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Shani Dev Katha: जानें राहु के प्रकोप से कैसे दंडनायक बने थे शनिदेव, इंद्र देव को क्यों मिली पहली सजा

Shani Dev Katha: जानें राहु के प्रकोप से कैसे दंडनायक बने थे शनिदेव, इंद्र देव को क्यों मिली पहली सजा

कहते हैं कि शनि देव प्रसन्न होते हैं वो रंक से राजा हो जाता है और जिस पर शनि देव का क्रोध बरसता है उन्हें अपने जीवन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

कहते हैं कि शनि देव प्रसन्न होते हैं वो रंक से राजा हो जाता है और जिस पर शनि देव का क्रोध बरसता है उन्हें अपने जीवन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

Shanidev Katha: शनिदेव सूर्यलोक छोड़ने के बाद वाहन कौए के साथ काकलोक आ गए थे. इधर इंद्र ने देवराज पद खोने के बाद शनि से बदला लेने के लिए यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा. उन्होंने सूर्यदेव के पुत्र यम को भड़काया और यम की मां देवी संध्या का अपमान करने के लिए शनि को खोजकर वध के लिए उकसा दिया. पौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव काकलोक में अपनी माता छाया से दूरी का कष्ट भूलने लगे थे. वाहन काकोल की माता उन्हें पुत्र की तरह प्रेम-दुलार करती थीं. नारायण के हाथों खंडित राक्षस राहु बदला लेने के लिए शनिदेव को खोजते हुए काकलोक आ गए.

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    Shani Dev Katha: सनातन धर्म में शनिवार (Saturday) का दिन शनि देव को समर्पित है. इस दिन शनिदेव की पूजा करने और सरसों का तेल (Musturd Oil) चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर उनकी कृपा बरसती है. मान्यताओं के अनुसार, शनि देव अति क्रोधी स्वभाव के हैं. कहते हैं कि शनि देव प्रसन्न होते हैं वो रंक से राजा हो जाता है और जिस पर शनि देव का क्रोध बरसता है उन्हें अपने जीवन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है. शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं. आइए आपको बताते हैं राहु के प्रकोप से शनिदेव कैसे बने दंडनायक और इंद्र देव को क्यों मिली पहली सजा.

    शनिदेव सूर्यलोक छोड़ने के बाद वाहन कौए के साथ काकलोक आ गए थे. इधर इंद्र ने देवराज पद खोने के बाद शनि से बदला लेने के लिए यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा. उन्होंने सूर्यदेव के पुत्र यम को भड़काया और यम की मां देवी संध्या का अपमान करने के लिए शनि को खोजकर वध के लिए उकसा दिया. पौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव काकलोक में अपनी माता छाया से दूरी का कष्ट भूलने लगे थे. वाहन काकोल की माता उन्हें पुत्र की तरह प्रेम-दुलार करती थीं. नारायण के हाथों खंडित राक्षस राहु बदला लेने के लिए शनिदेव को खोजते हुए काकलोक आ गए. यहां उन्होंने काकलोक की दुष्ट शक्ति विकराल को वश में कर काकोल की माता को बंधक बना लिया और तमाम कष्ट दिए.

    काकोल को भी रत्न चोरी का आरोप लगाकर प्रताड़ित किया गया. अब तक शनिदेव समझ चुके थे कि काकलोक में कोई पीछा कर रहा है. एक दिन उन्होंने राहु को दबोच ही लिया. पूछने पर राहु ने उसने खुद को इंद्र का दूत बता शनि को देवताओं के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया. मगर जब शनिदेव उसके पक्ष में नहीं आए तो राहु ने इंद्रदेव को लोभ दिया कि वह शनिदेव को परास्त करवाकर देवराज का पद वापस दिलवा सकते हैं, बदले में इंद्रदेव राहु को पूरी तरह देवता बनाएंगे. इंद्रदेव ने यह शर्त मान ली.

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    यम और शनि देव भी हुए आमने-सामने
    इंद्र के बहकावे में आए यम, शनिदेव से बदला लेने काकलोक पहुंच गए. मगर दोनों के बीच माता के अपमान का विवाद शनिदेव के प्रयास से बढ़ने के बजाय समाप्त हो गया. यह देखकर इंद्रदेव ने बंधक बनाई काकोल की माता को ज्वाला में धकेलकर शनि को भड़काना चाहा. शनि ने माता को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इधर, राहु के प्रभाव में आ चुके शनिदेव दंडनायक स्वरूप में आ गए, जिसे देखकर त्रिदेव भी चिंतित हो गए. विष्णुजी ने शिवजी से प्रार्थना की तो महादेव ने बताया कि शनि अब कर्मफलदाता नहीं, दंडनायक स्वरूप में हैं, वो आज्ञाकारी नहीं विद्रोही हैं, न्यायकर्ता नहीं, विनाशक बन चुके हैं, उनका ये स्वरूप सृष्टि के अंत का आरंभ है.

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    राहु और शनि का शापित योग तीनों लोकों में अब त्राहि-त्राहि ला देगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार अपने वाहन काकोल की मां को भस्म करने की सजा देते हुए शनिदेव ने इंद्र को ऐसा प्रहार किया, जिससे वह सीधे देवराज सूर्य की सभा में गिरे. जहां उन्हें सभी देवताओं के उपहास का पात्र बनना पड़ा.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    Tags: Religion, धर्म

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