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Shani Jayanti 2020: शनि जयंती पर दुर्लभ योग, शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय जानें

News18Hindi
Updated: May 22, 2020, 7:21 AM IST
Shani Jayanti 2020: शनि जयंती पर दुर्लभ योग, शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय जानें
शनि जयंती पर पढ़ें शनि देव को खुश करने के उपाय

शनि जयंती २०२० (Shani Jayanti 2020):मनुष्य के कर्मों के हिसाब से ही शनि देव उसे वैसा ही फल देते हैं. मनुष्य द्वारा किया गया कोई भी बुरा या अच्छा काम शनिदेव से छिपा हुआ नहीं है...

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शनि जयंती २०२० (Shani Jayanti 2020): आज 22 मई को शनि जयंती है. इस दिन ग्रहों का दुर्लभ योग बन रहा है, जिसका प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा. ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार, शनि देव इस अपनी स्वराशि मकर राशि में हैं और मकर राशि में शनि गुरु के साथ युति बना रहे हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मनुष्य के कर्मों के हिसाब से ही शनि देव उसे वैसा ही फल देते हैं. मनुष्य द्वारा किया गया कोई भी बुरा या अच्छा काम शनिदेव से छिपा हुआ नहीं है.

इन मन्त्रों से करें शनि की पूजा:

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:



ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:



मंत्र- ॐ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:

शनि देव को प्रसन्न करने के उपाय:

- शनि जयंती या शनिवार के दिन शनि देवता के नाम पर सरसों के तेल का और एक रूपया दान करने का काफी महत्व है. ऐसा माना जाता है कि शनि ऐसे जातकों से प्रसन्न होते हैं और जातक को ग्रह बाधा से मुक्ति मिल जाती है. शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक उनकी मूर्ति के आगे नहीं बल्कि शिला के आगे जलाना शुभ माना जाता है.
- लॉकडाउन की वजह से इस बार आप शनि जयंती के दिन मंदिर नहीं जा सकते हैं तो ऑनलाइन माध्यम से सरसों का तेल गरीबों को दान कर सकते हैं.

- शनि जयंती के दिन घर पर ही शनिदेव के मंत्रों और शनि चालीसा का जाप कर सकते हैं.

- शनि जयंती के दिन शनिदेव को तेल के साथ ही तिल, काली उदड़ या कोई काली वस्तु भी भेंट करें.के दिन शनिदेव की पूजा करने के पश्चात राम भक्त हनुमान जी की पूजा करना शुभ माना जाता है. हनुमान जी की पूजा करने के दौरान सिंदूर चढ़ाएं और केला अर्पित करके सुख-शांति की प्रार्थना करें.

शनि चालीसा पढ़ें:
दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
जयति जयति शनिदेव दयाला।

करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै।

माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥

परम विशाल मनोहर भाला।

टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके।

हिय माल मुक्तन मणि दमके॥

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।

पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन।

यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥

सौरी, मन्द, शनी, दश नामा।

भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं।

रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥

पर्वतहू तृण होई निहारत।

तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो।

कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥

बनहूँ में मृग कपट दिखाई।

मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा।

मचिगा दल में हाहाकारा॥

रावण की गति-मति बौराई।

रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका।

बजि बजरंग बीर की डंका॥

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा।

चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी।

हाथ पैर डरवायो तोरी॥

भारी दशा निकृष्ट दिखायो।

तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों।

तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी।

आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी।

भूंजी-मीन कूद गई पानी॥

श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई।

पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा।

नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी।

बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो।

युद्ध महाभारत करि डारयो॥

रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला।

लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई।

रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥

वाहन प्रभु के सात सुजाना।

जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी।

सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं।

हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा।

सिंह सिद्धकर राज समाजा॥

जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै।

मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी।

चोरी आदि होय डर भारी॥

तैसहि चारि चरण यह नामा।

स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं।

धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥

समता ताम्र रजत शुभकारी।

स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै।

कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥

अद्भुत नाथ दिखावैं लीला।

करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई।

विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत।

दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा।

शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥

दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों 'भक्त' तैयार।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: May 22, 2020, 7:21 AM IST
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