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पिता सूर्यदेव और इंद्र को हराकर शनिदेव ने जीत लिया था देवलोक, पढ़ें ये पौराणिक कथा

पिता सूर्यदेव और इंद्र को हराकर शनिदेव ने जीत लिया था देवलोक, पढ़ें ये पौराणिक कथा

शनिदेव बहुत जल्दी क्रोधित होने वाले देवता माने जाते हैं. Image - Shutterstock

शनिदेव बहुत जल्दी क्रोधित होने वाले देवता माने जाते हैं. Image - Shutterstock

Shanidev Katha: शनिवार का दिन शनिदेव (Shanidev) को समर्पित माना जाता है. शनिदेव को न्याय का देवता भी कहा जाता है. शनिवार को व्रत रखने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन में सुख-शांति ला देते हैं. शनिदेव अगर किसी पर क्रोधित हो जाएं तो उसका जीवन कष्टों से भर जाता है. एक बार शनिदेव देवराज इंद्र पर कुपित हो गए तो उन्होंने इंद्र देव को हराकर उनका देवलोक छीन लिया था. इस दौरान उन्होंने अपने पिता सूर्यदेव को भी युद्ध में परास्त कर बंदी बना लिया था.

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    Shanidev Katha: शनिदेव (Shanidev) को न्याय का देवता कहा जाता है. वे सभी लोगों को उनके कर्मों के हिसाब से फल प्रदान करते हैं. अगर कोई अच्छे कर्म करता है तो उसे शुभ फल मिलता है और अगर कोई बुरे कर्म करता है तो शनिदेव उसे दंड देते हैं. शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा (Shanidev Puja) करने के लिए काफी शुभ माना जाता है. शनिदेव का क्रोध जगजाहिर है. शनिदेव ने क्रोध से उनके पिता सूर्यदेव भी नहीं बच सके थे. इंद्र देव (Indra Dev) से नाराज शनिदेव के सामने जब उनके पिता खुद आए तो शनिदेव ने उन्हें भी नहीं बख्शा था. शनिदेव ने पिता सूर्यदेव और देवलोक के राजा इंद्र को हराकर देवलोक पर भी विजय हासिल कर ली थी. इस पौराणिक कथा के जरिये जानें की आखिर शनिदेव इंद्र पर क्रोधित क्यों हुए और उन्होंने देवलोक पर क्यों जीत हासिल की.

    ये है पौराणिक कथा.
    शनिदेव से जुड़ी इस पौराणिक कथा के अनुसार जब शनिदेव अपनी मां छाया की मृत्यू के बाद अपने वाहन काकोल से अपने घर जा रहे थे उसी वक्त राजा इंद्र ने शनिदेव के वध का प्रयास किया. इसके लिए इंद्र ने सूर्य पुत्र यम को मोहरा बनाया, हालांकि दोनों के बीच सामंजस्य के चलते ऐसा नहीं हो सका. इससे नाराज इंद्र ने काकोल की मां को भस्म कर दिया. इससे शनिदेव भड़क गए और उन्होंने देवराज इंद्र के सीने पर प्रहार कर उन्हें पस्त कर दिया. शनिदेव इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने सभी देवताओं को दंड देने का निर्णय ले लिया. वहीं, राहु के प्रभाव में आने के कारण शनिदेव दंडनायक बन गए. उन्होंने राजा इंद्र को देवलोक छोड़ने की चेतावनी देते हुए सभी देवताओं को देवलोक छोड़ने के लिए ललकारा.

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    देवताओं के प्रमुख होने के चलते सूर्यदेव ने अपने बेटे शनिदेव की चुनौती को स्वीकार कर लिया और उनसे युद्ध किया. हालांकि शनिदेव के प्रकोप के सामने कोई भी देवता नहीं टिक सका और सूर्यदेव भी शनि से परास्त हो गए. जब युद्ध खत्म हुआ तो शनिदेव ने देवराज इंद्र का मुकुट छीनकर सूर्यदेव और इंद्र को बंधक बना लिया. इसी दौरान देत्य गुरु शुक्राचार्य ने शनिदेव को सहयोग देने का वादा किया और उन्हें देवलोक पर अधिकार करने का लोभ दिखाया.

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    हालांकि शनिदेव ने चेताया कि देवलोक जीतने के बाद वे असुरों को भी उनके कर्मों का दंड देंगे. वह उनके दरवाजे पर भी दस्तक देंगे और सभी को अपने किए कर्मों का दंड जरूर मिलेगा. शनिदेव ने राहु को भी
    चेतावनी दी की अगर लाभ के लिए वे यहां-वहां भटकेंगे तो उन्हें भी दंडित किया जाएगा. इस तरह शनिदेव न्याय के देवता के तौर पर प्रतिष्ठित हुए.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    Tags: Religion, Shanidev

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