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शरद पूर्णिमा 2019: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि, खीर का करें सेवन

News18Hindi
Updated: October 13, 2019, 6:26 AM IST
शरद पूर्णिमा 2019: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि, खीर का करें सेवन
मान्यता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है.

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है इस दिन चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है.

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  • Last Updated: October 13, 2019, 6:26 AM IST
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हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का अपना विशेष महत्‍व है. मान्‍यता है कि शरद पूर्णिमा का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है इस दिन चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है. शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा, माता लक्ष्‍मी और भगवान विष्‍णु की पूजा की जाती है. शरद पूर्णिमा का चांद और साफ आसमान मानसून के पूरी तरह चले जाने का प्रतीक भी है. कहते हैं ये दिन इतना शुभ और सकारात्मक होता है कि छोटे से उपाय से बड़ी-बड़ी विपत्तियां टल जाती हैं. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इसी दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था, इसलिए धन प्राप्ति के लिए भी ये तिथि सबसे उत्तम मानी जाती है. अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा
को शरद पूर्णिमा कहा जाता है. इस साल शरद पूर्णिमा का पर्व 13 अक्टूबर यनी आज है.

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शरद पूर्णिमा का महत्व

मान्यता है कि जो विवाहित स्त्रियां इस दिन व्रत रखती हैं उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है. इसके अलावा जो माताएं इस व्रत को करती हैं उनके बच्‍चे दीर्घायु होते हैं. अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखें तो उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है. इस दिन प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण, धन की देवी मां लक्ष्मी और सोलह कलाओं वाले चंद्रमा की उपासना से अलग-अलग वरदान प्राप्त किए जाते हैं. शरद पूर्णिमा की रात में आकाश के नीचे खीर रखने की भी परंपरा है. इस दिन लोग खीर बनाते हैं और फिर 12 बजे के बाद उसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करते हैं. मान्‍यता है कि इस दिन चंद्रमा आकाश से अमृत बरसाता है इसलिए खीर भी अमृत वाली हो जाती है. ये अमृत वाली खीर कई रोगों को दूर करने की शक्ति रखती है.

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 13 अक्‍टूबर 2019 की रात 12 बजकर 36 मिनट से
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पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 14 अक्‍टूबर की रात 02 बजकर 38 मिनट तक

चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट

शरद पूर्णिमा व्रत विधि

पूर्णिमा के दिन सुबह में इष्ट देव का पूजन करें.

इन्द्र और महालक्ष्मी जी की पूजा करके घी के दीपक जलाएं. मां लक्ष्मी की पूजा में गन्ध पुष्प का इस्तेमाल करें.

ब्राह्माणों को खीर का भोजन कराना चाहिए और उन्हें दान दक्षिणा देनी चाहिए.

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लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए इस व्रत को विशेष रूप से किया जाता है. इस दिन जागरण करने वालों की धन-संपत्ति में वृद्धि होती है.

रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करना चाहिए.

मंदिर में खीर का दान करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इस दिन चांद की चांदनी से अमृत बरसता है.

रात 12 बजे के बाद अपने परिजनों में खीर का प्रसाद बांटें.

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First published: October 12, 2019, 4:42 PM IST
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