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    Navratri Day 5, Skandmata Puja: स्कंदमाता की पूजा से बढ़ेगी बुद्धि, मिलेगा संतान सुख, जानें पूजा विधि, मंत्र

    नवरात्रि 2020 के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा से मनोकामना पूरी होती है
    नवरात्रि 2020 के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा से मनोकामना पूरी होती है

    शारदीय नवरात्रि २०२० (Shardiya Navratri 2020/Navratri Fifth Day):नवरात्रि (Navratri 2020)के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा लाभदायी होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी स्कंदमाता की कृपा से ही कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत जैसी रचनाएं हुई हैं.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 21, 2020, 6:44 AM IST
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    शारदीय नवरात्रि २०२० (Shardiya Navratri 2020/Navratri Fifth Day): आज नवरात्रि (Navratri 2020) का पांचवां दिन है यानी आज पंचमी तिथि है. आज भक्त मां स्कंदमाता (Skandmata) की पूजा अर्चना कर रहे हैं. स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कन्दमाता कहा गया है. भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं. मां की चार भुजाएं हैं जिसमें दोनों हाथों में कमल के पुष्प हैं. देवी स्कन्दमाता ने अपने एक हाथ से कार्तिकेय को अपनी गोद में बैठा रखा है और दूसरे हाथ से वह अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं. कहा गया है कि देवी स्कंदमाता की कृपा से ही कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत जैसी रचनाएं हुई हैं. मां स्कन्दमाता को वैसे तो जौ-बाजरे का भोग लगाया जाता है, लेकिन शारीरिक कष्टों के निवारण के लिए माता को केले का भी भोग लगाया जाता है.

    स्कन्दमाता की पूजा विधि

    नवरात्रि के पांचवें दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें. इसके बाद मां की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करके कलश की स्थापना करें. उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका भी स्थापित करें. आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें. हाथ में फूल लेकर 'सिंहासनागता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी' मंत्र का जाप करते हुए फूल चढ़ा दें. मां की विधिवत पूजा करें, मां की कथा सुनें और मां की धूप और दीप से आरती उतारें. उसके बाद मां को केले का भोग लगाएं और प्रसाद के रूप में केसर की खीर का भोग लगाकर प्रसाद बांटें.



    स्कन्दमाता का मंत्र:
    सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.
    शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

    ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥

    संतान प्राप्ति हेतु जपें स्कन्द माता का मंत्र

    'ॐ स्कन्दमात्रै नम:..'

    इस मंत्र से भी मां की आराधना की जाती है

    या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:.. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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