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नवरात्रि के 6वें दिन पढ़ें देवी कात्यायनी का कवच एवं कथा, मिलेगा मनचाहा जीवनसाथी

सपने में मां दुर्गा का मुस्कुराते हुए दिखना शुभ संकेत होता है-Image/Shutterstock

सपने में मां दुर्गा का मुस्कुराते हुए दिखना शुभ संकेत होता है-Image/Shutterstock

Shardiya Navratri 2021: नवरात्रि के नौ दिनों में माता की उपासना का बहुत अधिक महत्व है. नवरात्रि के 6वें दिन देवी कात्यायनी का कवच और कथा पढ़कर मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है.

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    Shardiya Navratri 2021: नवरात्रि का आज 6वां दिन है. आज के दिन मां दुर्गा के कात्यायिनी (Maa Katyayani) रुप की आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता के कात्यायनी स्वरुप की आराधना करने से अविवाहित जातक को मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है. मां कात्यायनी के पूजन-अर्चन से मन मजबूत होता है और साधक अपनी इन्द्रियों को काबू में कर सकता है. षष्ठी तिथि के दिन गोधुलि बेला यानी शाम के वक्त मां कात्यायनी की पूजा को सर्वश्रेष्ठ माना गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी कात्यायिनी द्वारा राक्षस महिषासुर का मर्दन किया था. मां दुर्गा (Goddess Durga) का एक नाम महिषासुरमर्दिनी भी है.

    देवी मां कात्यायनी का कवच
    कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी.
    ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी॥
    कल्याणी हृदयम् पातु जया भगमालिनी॥

    यह है मां कात्यायनी की कथा
    पौराणिक कथा के अनुसार, कात्य गोत्र में जन्में महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासन की थी. उन्होंने संतान रूप में पुत्री प्राप्ति के लिए कठोर तप किया. महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनके घर कन्या रुप में जन्म लिया था. इस वजह से उनका नाम देवी कात्यायनी पड़ा. मान्यता है कि मां कात्यायनी का गुण शोधकार्य का है. इनकी कृपा हो जाए तो सारे कार्य पूर्ण हो जाते हैं. यह भी मान्यता है कि भगवान कृष्ण को अपने पति के रुप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों द्वारा मां कात्यायनी की पूजा ही की गई थी. यह पूजन कालिंदी यमुना के तट पर किया गया था. यही वजह है कि ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रुप में वे प्रतिष्ठित हैं.

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    मां का स्वरुप अत्यंत भव्य एवं दिव्य है. वे स्वर्ण के समान दमकती हैं. देवी कात्यायनी मां चारभुजाधारी हैं. इनके दाईँ तरफ स्थित ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा है. इसका तात्पर्य है कि अपने भक्तों के लिए वे हमेशा अभयदान देकर प्रसन्न होती हैं. इससे नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है. भक्त माता से अगर कुछ मांगता है तो उसकी मनोकामना मां पूर्ण करती हैं. बाईं ओर के ऊपर वाले हाथ में तलवार है जो कि दुष्टों का मर्दन करने के लिए हैं वहीं नीचे वाले हाथ में कमल का फूल है. माता का वाहन सिंह हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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