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Shardiya Navratri 2021: मां सती की जीभ से बना शक्तिपीठों में से एक 'ज्वाला देवी मंदिर', जानें इसका रहस्य

Shardiya Navratri 2021: मां सती की जीभ से बना शक्तिपीठों में से एक 'ज्वाला देवी मंदिर', जानें इसका रहस्य

ज्वाला देवी मंदिर में बिना तेल और बाती के नौ ज्वालाएं जल रही हैं.

ज्वाला देवी मंदिर में बिना तेल और बाती के नौ ज्वालाएं जल रही हैं.

Shardiya Navratri 2021: शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी मंदिर (Jwala Devi Temple) में माता सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी. इस कारण यह मंदिर प्रमुख 9 शक्तिपीठों में शामिल है.

    Shardiya Navratri 2021: शारदीय नवरात्रि का आज पांचवा दिन है. नवरात्रि मां दुर्गा की उपासना का विशेष पर्व है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है. नवरात्रि के पावन दिनों में मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है जो अपने भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं. मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं. माता रानी उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. नवरात्रि में मां दुर्गा को खुश करने के लिए उनके भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं.

    क्या है शक्तिपीठ
    दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में ‘बृहस्पति सर्व’ नामक यज्ञ करवाया और उस यज्ञ में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन जान-बूझकर अपने जमाता भगवान शंकर को नहीं बुलाया. इस पर भगवान शंकरजी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर अपमानित महसूस किया और सती ने यज्ञ-अग्नि कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी. भगवान शंकर ने यज्ञकुंड से सती के पार्थिव शरीर को निकाल कंधे पर उठा लिया और दिव्य नृत्य करने लगे. भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल किया और माता सती पर प्रहार कर दिया. हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि जहां-जहां माता सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आया हैं. ये शक्तिपीठ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं और पूजा-अर्चना द्वारा प्रतिष्ठित हैं.

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    ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
    शक्तिपीठ वे जगह हैं जहां माता सती के अंग गिरे थे. शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी मंदिर में माता सती की जिह्वा (जीभ) गिरी थी. इस कारण यह मंदिर प्रमुख 9 शक्तिपीठों में शामिल है. हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा घाटी से 30 किलोमीटर दक्षिण में ज्वाला देवी मंदिर स्थित है. यह मंदिर माता के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहां पर किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती है, बल्कि मंदिर के गर्भगृह से निकल रहें ज्वाला को माता का स्वरूप मानकर पूजा जाता हैं. यहां पृथ्वी के गर्भ नौ ज्वालाएं निकल रही हैं. ज्वाला देवी मंदिर को जोतावाली का मंदिर और नगरकोट मंदिर भी कहा जाता है. ज्वाला देवी मंदिर को खोजने का श्रेय पांडवों को जाता है. नवरात्रि में इस मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहता है. हालांकि कोरोना से बचने के लिए मंदिर में भीड भाड़ पर रोक लगाई गई है.

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    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां माता ज्वाला के रूप में विराजमान हैं और भगवान शिव यहां उन्मत भैरव के रूप में स्थित हैं. इस मदिर का चमत्कार यह है कि यहां कोई मूर्ति नहीं है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रहीं 9 ज्वालों की पूजा की जाती है. आजतक इसका कोई रहस्य नहीं जान पाया है कि आखिर यह ज्वाला यहां से कैसे निकल रही है. कई भू-वैज्ञानिक ने कई किमी की खुदाई करने के बाद भी यह पता नहीं लगा सके कि यह प्राकृतिक गैस कहां से निकल रही है. साथ ही आजतक कोई भी इस ज्वाला को बुझा भी नहीं पाया है.

    ज्वाला देवी मंदिर में बिना तेल और बाती के नौ ज्वालाएं जल रही हैं, जो माता के 9 स्वरूपों का प्रतीक हैं. मंदिर एक सबसे बड़ी ज्वाला जो जल रही है, वह ज्वाला माता हैं और अन्य आठ ज्वालाओं के रूप में मां मां अन्नपूर्णा, मां विध्यवासिनी, मां चण्डी देवी, मां महालक्ष्मी, मां हिंगलाज माता, देवी मां सरस्वती, मां अम्बिका देवी एवं मां अंजी देवी हैं.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

    Tags: Durga Puja 2021, Navratri 2021, Religion

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