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Shardiya Navratri 2021: नवरात्रि के मौके पर जानें मां भगवती के इन रहस्यमयी मंदिरों के बारे में, क्या है इनकी कहानी

मां भगवती के रहस्‍यमयी मंद‍िर. Image-shutterstock.com

मां भगवती के रहस्‍यमयी मंद‍िर. Image-shutterstock.com

Shardiya Navratri 2021: मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा (Maa Durga) का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं. माता रानी उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

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    Shardiya Navratri 2021: आज नवरात्रि का सातवां दिन है. नवरात्रि मां दुर्गा (Maa Durga) की उपासना का विशेष पर्व है. नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है. नवरात्रि के पावन दिनों में मां के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है जो अपने भक्तों को खुशी, शक्ति और ज्ञान प्रदान करती हैं. मान्यता है कि नवरात्रि के व्रत रखने वालों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उनके सभी संकट दूर हो जाते हैं. माता रानी उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. शारदीय नवरात्रि में पूरे नौ दिन तक व्रत रखने वाले भक्त मां दुर्गा को खुश करने के लिए दुर्गा चालीसा का पाठ भी करते हैं. महासप्तमी के मौके पर आइए आपको बताते हैं मां भगवती के रहस्‍यमयी मंद‍िरों के बारे में. देवी मां के अनोखे मंद‍िर अपने आप में खास हैं. आइए जानते हैं क्या है मां भगवती के इन रहस्यमयी मंदिरों की खासियत और कहां है ये मंदिर.

    नवदुर्गा शक्ति मंदिर
    उत्‍तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की खुर्जा तहसील में स्‍थापित नवदुर्गा शक्ति मंदिर को लेकर मान्‍यता है कि इस मंद‍िर की 108 परिक्रमाएं लगाने से हर मनोकामना पूरी होती है. इसके अलावा मंदिर परिसर में एक स्‍तंभ भी है जिसे मनोकामना स्‍तंभ के नाम से जाना जाता है. कहते हैं क‍ि मंद‍िर की पर‍िक्रमा के बाद इस मनोकामना स्‍तंभ पर गांठ भी लगानी चाह‍िए. ऐसा करने से मन की हर मुराद पूरी हो जाती है. मंद‍िर में मौजूद देवी भगवती की प्रतिमा में मां के नौ रूप नजर आते हैं. मां की यह भव्‍य प्रतिमा चार टन अष्‍टधातु से बनी है जिसके 27 खंड हैं.

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    मान्‍यता है कि मां दुर्गा की इतनी भव्‍य और विलक्षण मूर्ति पूरे भारतवर्ष में कही. माता की प्रतिमा 18 भुजाओं वाली है. कहते हैं कि इस मूर्ति को 100 से अधिक मूर्तिकारों ने तैयार किया था. यह दिव्‍य मूर्ति 14 फीट ऊंची और 11 फीट चौड़ी है. मां की प्रतिमा के दाईं ओर हनुमान जी और बाईं ओर भैरो जी की प्रतिमा है. रथ के शीर्ष पर भगवान शिव स्थापित हैं और रथ के सारथी भगवान गणेश हैं.

    लकम्‍मा देवी का मंद‍िर
    लकम्‍मा देवी का मंद‍िर कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद तहसील के गोला गांव में स्थित है. यहां आने वाले श्रद्धालु देवी मां से मन्नत मांगते हुए पेड़ पर चप्पल बांधते हैं. इसके बाद जब मन्‍नतें पूरी हो जाती हैं तो वह मंदिर आकर देवी मां को चप्पलों की माला चढ़ाते हैं. मान्यता है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई उन्‍हीं चप्‍पलों को पहनकर देवी मां रात में न‍िकलती हैं और मन्‍नतें पूरी करती हैं.

    मां बहरारे वाली माता मंदिर
    मुरैना के न‍िकट कैलारस-पहाड़गढ़ मार्ग पर जंगल क्षेत्र के पहाड़ों पर मां बहरारे वाली माता का मंद‍िर स्थित है. यह एक रहस्‍यमयी मंदिर है. मान्यता है कि नवरात्रि के 9 द‍िनों में मां बहरारे की मूर्ति का आकार प्रत‍िद‍िन बढ़ता रहता है. यही नहीं नवमी के द‍िन तो मां की मूर्ति गर्भ गुफा से बाहर आ जाती है. मंदिर के संबंध में कथा म‍िलती है क‍ि पाडंवों ने यहां अज्ञातवास के दौरान अपनी कुलदेवी की पूजा की थी और पूजा के दौरान ही कुलदेवी एक बड़ी शिला में समा गई थीं. तब से माता की इसी श‍िला के रूप में पूजा की जाती है.

    पाषाण देवी मंदिर
    उत्तराखंड के नैनीताल में पाषाण देवी का मंदिर है. यहां देवी के 9 रूपों के एक साथ दर्शन होते हैं. यहां नैनी झील के क‍िनारे एक चट्टान पर मां भगवती की आकृत‍ि बनी है जो क‍ि प्रकृति के द्वारा ही न‍िर्मित है. मान्‍यता है क‍ि मातारानी हजारों वर्षों से यहां व‍िराजकर पहाड़ी इलाकों की रक्षा कर रही हैं. मंद‍िर पर‍िसर में ही 9 पिंड‍ियां हैं, ज‍िन्‍हें माता के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है. इस मंद‍िर में मातारानी को लहंगा चुनरी की जगह स‍िंदूर का चोला पहनाया जाता है.

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    स्‍थानीय‍ न‍िवास‍ियों के अनुसार एक बार एक अंग्रेज इस रास्‍ते से गुजर रहा था. तभी उसने इस मंद‍िर को देखा और छोटे से मंद‍िर का मजाक उड़ाने लगा. उसके ऐसा करते ही वह घोड़े सह‍ित झील में ग‍िर गया. इसके बाद उसने देवी भगवती से क्षमा प्रार्थना की. तब वह झील से न‍िकल सका. बाहर आते ही उसने मां के दरबार में स‍िर झुकाया और तब जाकर वह आगे बढ़ सका.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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