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Shattila Ekadashi 2020: यहां पढ़ें षटतिला एकादशी की कथा, इसके बिना अधूरा है व्रत

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Updated: January 19, 2020, 6:03 AM IST
Shattila Ekadashi 2020: यहां पढ़ें षटतिला एकादशी की कथा, इसके बिना अधूरा है व्रत
षटतिला एकादशी कथा

षटतिला एकादशी 2020 (Shattila Ekadashi 2020): षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है. षटतिला एकादशी को काफी अहम माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है.

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  • Last Updated: January 19, 2020, 6:03 AM IST
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षटतिला एकादशी 2020 (Shattila Ekadashi 2020): षटतिला एकादशी 20 जनवरी को पड़ रही है. षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है. षटतिला एकादशी को काफी अहम माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ने और सुनने का विधान है. यहां पढ़ें षटतिला एकादशी की व्रत कथा...

षटतिला एकादशी व्रत कथा:

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुत पहले के समय में एक बार नारद मुनि आकाश, पाताल और धरती लोक का भ्रमण करते हुए हुए भगवान विष्णु के पास पहुंचे. उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना कि वो उन्हें षटतिला एकादशी की कथा पूरी बताएं. इस पर भगवान विष्णु ने नारद जी को षटतिला एकादशी की कथा सुनानी शुरू की...

भगवान विष्णु ने कथा शुरू करते हुए कहा कि एक बार की बात है बहुत समय पहले उनकी एक ब्राह्मणी परम भक्त थी. वो पूरे विधि विधान के साथ व्रतों को नियमों का पालन करते हुए पूरा करती थी. ब्राह्मणी ने एक बार पूरे एक महीने तक व्रत किया. इतने लंबे समय तक व्रत करने की वजह से वो काफी दुबली और कमजोर हो गई. लेकिन व्रत की वजह से उनका शरीर शुद्ध हो गया. ऐसे में भगवान ने सोचा कि ब्राह्मणी भक्त को विष्णुलोक तो मिल जाएगा लेकिन उसकी आत्मा भटकती रहेगी क्योंकि वो अतृप्त ही है.

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ब्राह्मणी ने व्रत के दौरान किसी को दान-पुण्य भी नहीं किया था जिस वजह से उसे विष्णु लोक में जाकर मुक्ति और तृप्ति मिलना असंभव था. भगवान विष्णु ने ब्राह्मणी की तृप्ति के लिए खुद एक भिखारी का रूप बनाया और उनके घर पर भिक्षा लेने पहुंचे. उन्होंने आवाज लगायी तो ब्राह्मणी मिट्टी का पिंड लेकर दरवाजे पर आई और उसे ही भिक्षुक का रूप धारण किए भगवान विष्णु को दे दिया.

भगवान विष्णु वहां से अपने लोक वापस लौट आए. मृत्यु के बाद वह ब्राह्मणी विष्णुलोक पहुंची, जहां पर उसे एक आम का पेड़ और एक कुटिया मिली, जो धन-धान्य से रहित थी. वह खाली कुटिया देखकर चिंतित हो गई. तब उसने पूछा कि उसने सभी व्रत विधि विधान से किए, फिर उसे खाली कुटिया और आम का एक पेड़ क्यों मिला.तब भगवान विष्णु ने कहा कि तुमने अपने जीवन काल में कभी भी किसी को अन्न या धन दान नहीं किया. इस कारण से तुम्हें यह दंड मिला है. फिर उसने श्रीहरि से क्षमा याचना कर मुक्ति का उपाय पूछा. तब उन्होंने बताया कि तुम अपनी कुटिया का द्वार बंद कर लेना. जब देव कन्याएं तुम से मिलने के लिए आएंगी तो तुम उनसे षटतिला एकादशी व्रत की विधि पूछ लेना. जब वे षटतिला एकादशी व्रत की विधि बता दें, तभी द्वार खोलना.

उस ब्राह्मणी ने वैसा ही किया जैसा भगवान विष्णु ने बताया था. षटतिला एकादशी व्रत की विधि जानने के बाद उसने वैसे ही षटतिला एकादशी व्रत किया. व्रत की महिमा ऐसी हुई कि ब्राह्मणी अति सुंदर हो गई और उसकी कुटिया में रुपये-पैसे की कोई कमी नहीं रही.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: January 19, 2020, 6:03 AM IST
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