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Shattila Ekadashi 2022: षटतिला एकादशी पर आज पाएं श्रीहरि संग लक्ष्मी कृपा, धन की कमी होगी दूर

Shattila Ekadashi 2022: षटतिला एकादशी पर आज पाएं श्रीहरि संग लक्ष्मी कृपा, धन की कमी होगी दूर

षटतिला एकादशी व्रत

षटतिला एकादशी व्रत

Shattila Ekadashi 2022: षटतिला एकादशी व्रत आज 28 जनवरी दिन शुक्रवार को है. एकादशी व्रत पर शुक्रवार दिन का संयोग है. षटतिला एकादशी को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा होती है और शुक्रवार को माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) की पूजा करते हैं.

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    Shattila Ekadashi 2022: षटतिला एकादशी व्रत आज 28 जनवरी दिन शुक्रवार को है. एकादशी व्रत पर शुक्रवार दिन का संयोग है. षटतिला एकादशी को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा होती है और शुक्रवार को माता लक्ष्मी (Mata Lakshmi) की पूजा करते हैं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी एक दूसरे के पूरक हैं. एक की आराधना से दूसरा स्वयं ही प्रसन्न हो जाता है. षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ पूजा करने का अच्छा संयोग बना है. इस असवर पर आप भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों को प्रसन्न करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं. माता लक्ष्मी की कृपा से आपके जीवन में धन की कमी दूर हो जाएगी, सुख समृद्धि बढ़ेगी और भगवान विष्णु की कृपा से सभी पाप ​मिट जाएंगे और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्रा​प्ति होगी. आइए जानते हैं कि षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

    षटतिला एकादशी पर विष्णु एवं लक्ष्मी पूजा

    षटतिला एकादशी के दिन व्रत एवं पूजा का संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की साथ वाली मूर्ति या तस्वीर को एक चौकी पर स्थापित कर दें. भगवान विष्णु का गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं और उनको चंदन, फूल, अक्षत्, पान का पत्ता, सुपारी, पीले वस्त्र, रोली, धूप, दीप, गंध, बेसन के लड्डू, तुलसी का पत्ता आदि अर्पित करें.

    यह भी पढ़ें: 28 जनवरी को षटतिला एकादशी व्रत, जानें तिथि, पूजा मुहूर्त, पारण एवं महत्व

    फिर माता लक्ष्मी को लाल फूल, कमल का फूल, कमल गट्टा, सुपारी, अक्षत्, सिंदूर, लाल वस्त्र, फल, सफेद बर्फी, खीर आदि अर्पित करें. उसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को धूप, दीप, गंध चढ़ाएं. इसके पश्चात षटतिला एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें. इस दौरान कनकधारा स्तोत्र का भी पाठ कर सकते हैं.

    पूजा के अंत में घी के दीपक या कपूर से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की बारी बारी से आरती करें. पूजा के बाद प्रसाद वितरित कर दें और दान के लिए वस्तुएं छूकर अलग रख दें. उसे किसी गरीब या ब्राह्मण को दान कर दें.

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    शाम के समय में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु के लिए घी का दीपक जलाएं. उनकी आरती करें. रात्रि के समय में भगवत जागरण करें. अगले दिन प्रात: स्नान के बाद पूजन करें. फिर पारण करके षटतिला एकादशी व्रत का पूरा करें.

    इस प्रकार से आप षटतिला एकादशी पर पूजा करके भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त कर सकते हैं. व्रत के दिन मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहें.

    (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

    Tags: Dharma Aastha, Lord vishnu

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