Shravan Purnima 2019: आज और कल है श्रावण पूर्णिमा, जानिए महत्व, पूजा विधि

Shravan Purnima 2019: पुराणों के अनुसार गुरु श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री अमरनाथ की पवित्र छड़ी यात्रा का शुभारंभ होता है. यह यात्रा श्रावण पूर्णिमा को संपन्न होती है.

News18Hindi
Updated: August 14, 2019, 1:35 PM IST
Shravan Purnima 2019: आज और कल है श्रावण पूर्णिमा, जानिए महत्व, पूजा विधि
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Updated: August 14, 2019, 1:35 PM IST
Shravan Purnima 2019: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावण पूर्णिमा को मनाने की परंपरा है. इस बार श्रावण पूर्णिमा दो दिन आज और कल (14-15 अगस्त) को पड़ रही है. स दिन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा का आरम्भ भी होता है. सावन महीने की पूर्णिमा का दिन शुभ व पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन किए गए तप और दान का महत्व बाकी दिनों, महीनों से ज्यादा माना जाता है. सावन पूर्णिमा की तिथि धार्मिक दृष्टि के साथ ही साथ व्यावहारिक रूप से भी बहुत ही महत्व रखती है. सावन माह भगवान शिव की पूजा उपासना का महीना माना जाता है. सावन में हर दिन भगवान शिव की विशेष पूजा करने का विधान है. इस माह की पूर्णिमा तिथि इस मास का अंतिम दिन माना जाता है. अत: इस दिन शिव पूजा व जल अभिषेक से पूरे माह की शिव भक्ति का पुण्य प्राप्त होता है. आइए जानते हैं इसका महत्व और पूजा विधि.

श्रावण पूर्णिमा महत्व
श्रावण पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ होता है. इस दिन पूजा उपासना करने से चंद्रदोष से मुक्ति मिलती है, श्रावणी पूर्णिमा के दिन दान, पुण्यमहत्वपूर्ण होता है. इस दिन स्नान के बाद गाय को चारा खिलाना, चिंटियों, मछलियों आदि को दाना खिलाने का बहुत महत्व है. श्रावणी पर्व के दिन जनेऊ पहनने वाला हर धर्मावलंबी मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संकल्प लेकर जनेऊ बदलते हैं.

इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा का विधान होता है. विष्णु-लक्ष्मी के दर्शन से सुख, धन और समृद्धि कि प्राप्ति होती है. इस पावन दिन पर भगवान शिव, विष्णु, महालक्ष्मीव हनुमान को रक्षासूत्र अर्पित करना चाहिए.

श्रावण पूर्णिमा का व्रत व पूजा विधि
चूंकि इस दिन रक्षासूत्र बांधने या बंधवाने की परंपरा है इसलिये लाल या पीले रेशमी वस्त्र में सरसों, अक्षत, रखकर उसे लाल धागे में बांधकर पानी से सींचकर तांबे के बर्तन में रखें. इस दिन वेदों का अध्ययन करने की परंपरा भी है.
पूर्णिमा को देव, ऋषि, पितर आदि के लिये तर्पण भी करना चाहिये.
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इस दिन स्नाना के पश्चात गाय को चारा डालना, चिंटियों, मछलियों को भी आटा, दाना डालना शुभ माना जाता है.
मान्यता है कि विधि विधान से यदि पूर्णिमा व्रत का पालन किया जाये वर्ष भर वैदिक कर्म न करने की भूल भी माफ हो जाती है.

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श्रावण में रक्षाबंधन का त्‍यौहार
रक्षाबंधन का त्योहार भी श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. इसे सावनी या सलूनो भी कहते हैं. रक्षाबंधन, राखी या रक्षासूत्र का रूप है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं. उनकी आरती उतारती हैं तथा इसके बदले में भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है. उपहार स्वरूप उसे भेंट भी देता है.

श्रावण पूर्णिमा के दिन ही कजरी पूर्णिमा का पर्व भी पड़ता है. यह पर्व विशेषत: मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की कुछ जगहों में मनाया जाता है. कजरी नवमी के दिन महिलाएं पेड़ के पत्तों के पात्रों में मिट्टी भरकर लाती हैं जिसमें जौ बोया जाता है. कजरी पूर्णिमा के दिन महिलाएं पात्रों को सिर पर रखकर पास के किसी तालाब या नदी में विसर्जित करने के लिए ले जाती हैं. महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने पुत्र की लंबी आयु और उसके सुख की कामना करती हैं.

पुराणों के अनुसार गुरु श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री अमरनाथ की पवित्र छड़ी यात्रा का शुभारंभ होता है. यह यात्रा श्रावण पूर्णिमा को संपन्न होती है. मान्यता है कि श्रावण पूर्णिमा को चंद्रमा श्रवण नक्षत्र में गोचररत होता है. इसलिये पूर्णिमांत मास का नाम श्रावण रखा गया है. यह पूर्णिमा श्रावण पूर्णिमा कहलाती है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: August 14, 2019, 7:09 AM IST
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